भारत के पास प्राचीन समय से ही शरीर, मन और आत्म को एक साथ जोड़ने की कला और विज्ञान है, जिसे हम योग कहते हैं। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के युज् से हुई है जिसका अर्थ जोड़ना। यह न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। भारतीयों के लिए योग किसी दिव्य उपहार से कम नहीं है। यह भारत की एक अमूल्य आध्यात्मिक और शारीरिक विद्या है।
वैसे तो कई आसन हैं लेकिन सबसे प्रभावशाली आसनों में से एक सर्वांगासन भी है। योग में इसे ‘सभी आसनों की रानी’ कहा जाता है, क्योंकि इस आसन में शरीर का लगभग पूरा भार कंधों और ऊपरी पीठ पर रहता है और शरीर को उल्टी स्थिति में रखा जाता है। संस्कृत में सर्व का अर्थ पूरा या सभी और अंग का अर्थ शरीर के अंग होता है। माना जाता है कि नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह शरीर के कई हिस्सों के लिए लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं इसे कब, कैसे और कितनी देर करना चाहिए।
सर्वांगासन के फायदे
आगे बढ़ने से पहले सर्वांगासन के फायदे जान लेते हैं। यह शरीर में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने के साथ गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर सक्रिय करने में मदद करता है। साथ ही पैरों को आराम देने और एकाग्रता को बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा इस आसन को करने से तनाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कब करना चाहिए
योग में आसनों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना गया है। ऐसे में इसे सुबह खाली पेट करना फायदेमंद माना जाता है। वहीं, शुरुआत में इसे किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में सीखने की सलाह दी जाती है।
कैसे करें
- सबसे पहले योगा मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर लगभग 90 डिग्री तक ले जाएं।
- अब हाथों की मदद से कमर और पीठ को सहारा देते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सिर की दिशा में ले जाकर शरीर को ऊपर की ओर सीधा करें।
- दोनों हाथों से कमर और पीठ को सहारा दें और कोहनियों को जमीन पर टिकाएं। कंधे, गर्दन और सिर जमीन पर होने चाहिए। शरीर का अधिकांश भार कंधों पर रहे।
- पैरों को सीधा रखें और पंजों को ऊपर की ओर रखें।
- इस दौरान सांस सामान्य और नियंत्रित रखें। गर्दन को बिल्कुल न मोड़ें और न ही इधर-उधर देखने की कोशिश करें। कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं और सामान्य अवस्था में लौट आएं।
कितनी देर तक करें
पहली बार सर्वांगासन कर रहे हैं तो इसे लंबे समय तक करने की कोशिश न करें। शुरुआत में 10-15 सेकंड काफी होता है। अभ्यास बढ़ने पर इसे धीरे-धीरे 30 सेकंड से 1 मिनट तक ले जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। सर्वांगासन को किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में करें। साथ ही अपनी दिनचर्या में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
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