विज्ञापन में छपी मेनका की तस्वीर देख फिदा हो गए थे संजय गांधी, मां ने रातों-रात हटवा दिये थे पोस्टर

मेनका गांधी दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज में मिस लेडी बनी थीं। मेनका ने डेल्ही क्लास मिल्स यानि डीसीएम के लिए एक टॉवेल का बोल्ड विज्ञापन किया। कहा जाता है कि ये तस्वीरें देखकर ही संजय गांधी उनपर मोहित हुए थे।

Sanjay Gandhi
कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी (Photo- Indian Express Archive)

आज संजय गांधी (Sanjay Gandhi) की पुण्यतिथि है। 23 जून 1980 को विमान दुर्घटना में उनका आकस्मिक निधन हो गया था। संजय के निधन के बाद भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ आया था। संजय गांधी अपनी मां इंदिरा के बेहद करीब थे और तब सियासी गलियारों में कहा जाता था कि कोई भी फैसला उनकी मर्जी या सहमति के बगैर नहीं होता था। संजय गांधी के राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उनका निजी जीवन भी कम रोचक नहीं रहा।

शादी के ऐलान पर सब रह गए थे हैरान: 29 जुलाई 1974 को जब अचानक प्रधानमंत्री कार्यालय से संजय गांधी की सगाई की घोषणा हुई तो सब हैरान रह गए थे। हालांकि चंद करीबी लोगों को छोड़कर किसी को खबर नहीं थी कि आखिर गांधी परिवार की होने वाली बहू कौन है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता ने अपनी किताब ‘द संजय स्टोरी’ में मेनका और संजय की पहली मुलाकात का विस्तार से जिक्र किया है। विनोद लिखते हैं, ‘मेनका गांधी उस वक्त दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज में मिस लेडी चुनी गई थीं। ‘मिस लेडी’ बनने के बाद ही उन्हें मॉडलिंग के तमाम ऑफर आने लगे थे।’

मां ने हटवा दिया विज्ञापन: एक ऐसे ही ऑफर के बाद मेनका ने डेल्ही क्लॉथ मिल्स यानि डीसीएम के लिए एक टॉवेल का विज्ञापन किया था। यह विज्ञापन काफी बोल्ड था। दिल्ली में मेनका के इस विज्ञापन के होर्डिंग्स और पोस्टर कई जगह लगे। एक दिन अचानक इस विज्ञापन को हैंडल करने वाली कंपनी के पास मेनका गांधी की मां का फोन आया और उन्होंने इन विज्ञापनों को तत्काल हटाने को कह दिया। यहां तक कि तस्वीरों को वापस लौटाने के लिए भी बोल दिया।’ कहा जाता है कि इसी विज्ञापन में छपी मेनका की तस्वीर देखकर संजय गांधी उनपर फिदा हो गए थे।

यूं हुई थी मुलाकात: संजय गांधी की मेनका की कजिन से पहले से ही जान-पहचान थी। एक पार्टी में पहली बार मेनका गांधी से उनकी मुलाकात हुई थी। 1973 में जब दोनों की मुलाकात हुई तो मेनका गांधी की उम्र महज़ 17 साल की थी। बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और शादी का फैसला किया।

क्या बच सकती थी जान? वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने अपनी किताब ‘दरबार’ में उस विमान दुर्घटना का जिक्र किया है जिसमें संजय गांधी का निधन हो गया था। ‘ग्वालियर के युवा महाराज उस दिन संजय के साथ प्लेन में सिर्फ इसलिए नहीं जा सके, क्योंकि उस सुबह वह सफ़दरजंग फ्लाइंग क्लब पहुंचने में लेट हो गए थे। इसलिए संजय गांधी ने पायलट के साथ अकेले ही उड़ान भर दी। तीन चक्कर काटने के बाद विमान हवा में गोते खाता हुआ अचानक क्रैश हो गया। ये हादसा सुबह करीब साढ़े सात बजे हुआ था।’

‘द संजय स्टोरी’ में विनोद मेहता लिखते हैं, इस दुर्घटना की आशंका पहले से थी। एक तो संजय गांधी खतरनाक तरीके से विमान उड़ाते थे, जिसके बारे में सिविल एविएशन विभाग के अधिकारियों ने पहले ही उनकी मां इंदिरा गांधी को आगाह किया था। संजय गांधी कोल्हापुरी चप्पलों में ही विमान उड़ाने लगते थे, जबकि ये चप्पलें कॉकपिट में हवा के उच्च दबाव को झेलने में सक्षम नहीं थीं। राजीव गांधी ने भी उन्हें कई बार इसको लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी थी।

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