स्कूल में दोस्त को नहीं हरा पाए कुश्ती तो मंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव ने फिर दिया था चैलेंज, जानिए क्या थी वजह

मुलायम सिंह यादव के टीचर उदय प्रताप सिंह ने उनसे जुड़ा एक किस्सा शेयर किया है। ये किस्सी उनके सहकारिता मंत्री बनने के बाद का है। उन्होंने अपने दोस्त को मजाकिया अंदाज में कुश्ती लड़ने का चैलेंज दिया था।

Mulayam Singh Yadav
मुलायम ने अखिलेश से कहा था कि यदि शिवपाल ने इस्तीफा दे दिया था तो पार्टी को डूबने से फिर कोई नहीं बचा पाएगा।(<a href=" https://www.jansatta.com/photos/lifestyle-gallery/when-mulayam-singh-yadav-second-wife-sadhna-gupta-gave-interview-before-voting-and-counted-achievements/1762904/ "> मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता ने वोटिंग से एक दिन पहले दिए इंटरव्यू में कहा था-अब चुप नहीं बैठूंगी </a> )

समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने स्कूल में पढ़ते हुए ही राम मनोहर लोहिया के ‘जेल भरो आंदोलन’ में भाग लिया था। मुलायम ने इसके लिए गिरफ्तारी के लिए अपना नाम भी लिखाया था और सरकारी नीतियों को चुनौती दी थी। इसके बाद उनकी लोकप्रियता अपने क्षेत्र में लगातार बढ़ती गई। मुलायम के टीचर उदय प्रताप सिंह ने उनसे जुड़ा एक किस्सा यादव किया है। ये किस्सा भी मुलायम के स्कूल के दिनों का है।

‘न्यूज़ नशा’ नाम के यूट्यूब चैनल से बात करते हुए उदय प्रताप सिंह ने बताया, ‘हमारे स्कूल में सरयुद्दीन नाम का एक स्टूडेंट था। सरयुद्दीन ने पोल वोल्ट प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया और ये लाइव वेट चैंपियन बन गए। 26 जनवरी थी प्रिंसिपल साहब ने मुझसे कहा कि गेम का आयोजन करवाया जाए। बच्चे मुझे थोड़ा पसंद भी करते थे और सरयुद्दीन तो मेरे ही पास रहता था। मैंने मुलायम से कहा कि तुम सरयुद्दीन से कुश्ती कर लो।’

मंत्री बनने के बाद दोस्त को दिया चैलेंज: उदय प्रताप सिंह आगे बताते हैं, ‘सरयुद्दीन की ऊंचाई 6 फीट थे और मुलायम की कम थी। कुश्ती की प्रतियोगिता शुरू हुई तो मुलायम तो दांव-पेच से खेलते थे और सरयुद्दीन को ये सब नहीं मालूम था। ये उसको पटक तो लेते थे लेकिन इनकी छोटी बाहें उसके बड़े शरीर में नहीं आती थीं। कुश्ती में दोनों में से किसी की भी हार नहीं हुई और वह मुकाबला बराबर का रहा। सरयुद्दीन बाद में इसी विधानसभा का सिक्योरिटी अफसर हो गया।’

सरयुद्दीन ने टीचर को की ये शिकायत: उदय प्रताप सिंह ने आगे बताया, ‘मुलायम सिंह यादव आगे राजनीति में जाकर पहली बार सहकारिता मंत्री बने। 1977 में मैं किसी काम से आया हुआ था तो मैं लोगों से बात करता-करता पीछे चल रहा था और ये आगे-आगे थे। मुलायम रुके तो सरयुद्दीन त्रिपाठी खड़ा हुआ था। इन्होंने उसके कान में कुछ कहा और आगे चले गए। सरयुद्दीन ने बाद में मुझे कहा कि समझा लो इन्हें, ये मंत्री हो गए हैं लेकिन हमें बार-बार कुश्ती लड़ने का चैलेंज देते हैं। ये पूरा वाकया एक मजाकिया किस्सा था। मुलायम सिंह यादव का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा है कि वो अपने दोस्तों से ऐसे ही मिलते हैं।’

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