1- भीतर को पहचानें
सद्गुरु कहते हैं कि दुनिया में हम कौन हैं, यह समय और परिस्थितियां तय करती हैं। लेकिन हमारे भीतर हम कौन हैं, उसे कभी भी परिस्थितियों के अनुसार नहीं ढालना चाहिए। क्योंकि, परिस्थितियां आती हैं और चली जाती हैं। अगर आपने एक परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया तो दूसरी आने पर भी वैसा ही करना होगा। ऐसे में व्यक्ति को अपने मूल स्वभाव और दृष्टिकोण को परिस्थितियों के अनुसार बार-बार नहीं बदलना चाहिए।

2-प्रतिभाओं को पहचानें
सद्गुरु के अनुसार, अपने भीतर छिपी प्रतिभाओं और क्षमताओं को पहचानकर सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

3- अनुभव
सद्गुरु कहते हैं कि जीवन में जितनी गहराई से जुड़े होते हैं, जीवन का अनुभव उतना ही गहरा होता है।

4- कैसा होगा कल
कल कैसा होगा, यह इस बात से तय होता है कि आज आप कैसे सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं और जीवन को कैसे देखते हैं।

5- बेहतर जिंदगी जीने का तरीका
सद्गुरु कहते हैं कि कठिन समय को दुख में बिताने के बजाय आप जो कुछ भी कर रहे हैं या फिर जो कुछ भी हो रहा है, जिंदगी के हर पल में खुशी से झूमते चलें।

6- बोझ से हल्का हो जाएं
अक्सर हम बीते हुए दुख, तकलीफों और पुरानी गलतियों के बारे में सोचते हैं और पछताते हैं। ये सारी चीजें व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाती हैं। सद्गुरु कहते हैं कि, पुराने बोझ को लेकर चलने से बेहतर है आज में खुशी से जीएं। यानी जो बीत गया उसे जाने दें, वर्तमान में जो है उसमें खुशी से जीवन व्यतीत करें।

7- कर्म
सद्गुरु के अनुसार, कर्म का अच्छे और बुरे से कोई लेना-देना नहीं है। यह केवल कारण और प्रभाव के बारे में है।

8- जीवन का रहस्य
जीवन का रहस्य यही है कि आप जिस भी चीज को देखते हैं उसे कितना गौर से और गंभीर नजरिए से देखते हैं। इसमें पूरी तरह शामिल हो जाना चाहिए। लेकिन उलझना नहीं चाहिए। ठीक एक खेल की तरह शामिल हों, उलझें नहीं।

9- खुलकर जीएं
अगले जीवन में आपका मनुष्य के रूप में जन्म होगा या नहीं यह किसी को नहीं पता है। ऐसे में आपके पास जो कुछ भी प्रेम, खुशी या कौशल है उसे अंदर दबा कर रखने के बजाए दिखाएं। इन भावनाओं और गुणों को दबाकर अगले जीवन के लिए रखने का कोई अर्थ नहीं है।

10- आसपास का माहौल
सद्गुरु कहते हैं कि अगर आप अपने आसपास के लोगों की परवाह करते हैं, तो आपको खुद को एक ऐसा व्यक्ति बनाना चाहिए जिसके साथ रहना उन्हें अच्छा लगे।