पीरियड में रनिंग करनी चाहिए या नहीं? यह कैसे हो सकता है फायदेमंद, एक्सपर्ट्स से जानिए

माहवारी के दौरान महिलाओं में फीमेल हॉर्मोन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से थकान और कमजोरी लगती है। मासिक धर्म में दौड़ने से इन सभी समस्यों से छुटकारा मिल सकता है।

Should I run during my period or not know from experts
अपने शरीर के क्षमता के अनुसार ही दौड़ें (File Photo)

पीरियड के दौरान महिलाओं या लड़कियों के पेट में दर्द, थकान और ऐंठन जैसी कई तरह की समस्याएं होती हैं। इसलिए भी बहुत से लोग इस दौरान महिलाओं या लड़कियों को आराम करने की सलाह देते हैं। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक इन परेशानियों को कम करने के लिए महिलाएं कई तरह के उपाय भी करती हैं।

ऐसा ही एक उपाय पीरियड में रनिंग करना भी है। आप सोच रही होंगी कि लड़कियों के लिए पीरियड्स का समय बहुत ही पीड़ादायक होता। ऐसे में रनिंग करनी चाहिए या नहीं। तो इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए हम पहुंचें हैं स्त्री एवं प्रसुति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लवली जेठवानी के पास, इस सवाल के जवाब के साथ यहां आप जानेंगी कि पीरियड में रनिंग करने से फायदे होते हैं या नुकसान।

डॉक्टर लवली ने जनसत्ता डॉट कॉम से बातचीत करते हुए बताया कि पीरियड के दौरान महिलाओं में पेट दर्द, क्रैम्प्स, मसल्स क्रैम्प्स, सिरदर्द और शरीर फूला हुआ महसूस होता है। साथ ही ब्रेस्ट में भारीपन महसूस होता है। ऐसी स्थति में महिलाएं पीरियड (Period) को रेस्ट पीरियड मान लेती हैं और दवाई की तरफ रुख करती हैं। महिलाओं के शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन दर्द निवारक की तरह काम करता है और थकान और दर्द को कम करने में बहुत मदद करता है। जब आप दौड़ती है तो बॉडी में एंडोर्फिन का स्तर बढ़ता है। इससे पीरियड में होने वाले दर्द, थकान और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है। एंडोर्फिन वही है जो आप टैबलेट के रूप में खाती हैं।

वहीं लड़कियों में पीरियड के दौरान मूड स्विंग्स होना बहुत आम बात है। पीरियड में अधिकांश महिलाओं को थकान, चिड़चिड़ाहट और दर्द आदि की समस्या होती है। इससे बचाने के लिए आपको रनिंग करना चाहिए, रनिंग करना आपके मूड को ठीक करने में मदद कर सकता है। पीरियड में रनिंग करने से एंडोर्फिन्स और सिरोटोनिन्स जैसे अन्य हैप्पी हॉर्मोन्स (Feel Good Harmons) हमारे ब्रेन में रिलीज होते हैं जिससे मूड में अच्छे बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा रनिंग से महिलाओं में पीएमएस (Premenstrual syndrome) के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

डॉक्टर लवली ने बताया जिन महिलाओं को रनिंग के बाद भी पीरियड के दौरान दर्द में राहत नहीं मिलती है। उनके अंदर मांशपेशियों में कमजोरी होना, विटामिन डी या कैल्शियम की कमी होना आदि हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अपने शरीर के क्षमता के अनुसार ही दौड़ें, अधिक दौड़ न लगाएं।

पीरियड फ्लो के बारे में बात करते हुए बताया कि एथिलीट को छोड़कर बाकि लड़कियों में पीरियड में रनिंग करने से रक्त प्रवाह में सुधार हो सकता है। अपने से ज्यादा वजन उठाने या कोई भारी भरकम एक्सरसाइज करने से फ्लो कम हो सकता है। यह एथलीटों में अक्सर पाया जाता है लेकिन बाद में खान- पान और वजन को नियंत्रित करने से ठीक हो जाता है।

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