Republic Day 2021 Speech, Poems: ‘हम आजादी के मतवाले…’ इन कविताओं को शेयर कर दें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

Republic Day 2021 26th January Speech, Essay, Quotes, Poem: भारत के राष्ट्रपति दिल्ली में झंडा फहराते हैं और राष्ट्रीय गान गाया जाता है।

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Republic Day 2021 Speech, Essay: गणतंत्र दिवस देश का राष्ट्रीय पर्व है, इस दिन देश में अवकाश घोषित होता है

Republic Day 2021 26th January Speech, Quotes: गणतंत्र दिवस देश का राष्ट्रीय पर्व है, इस दिन देश में अवकाश घोषित होता है। 26 जनवरी को भारत का 72वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। साल 1950 में इसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने देश का संविधान लागू किया था। बता दें कि डॉ. भीमराव अंबेदकर द्वारा निर्मित संविधान को बनाने में करीब 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे।

इस पर्व पर लोग अपना देश प्रेम जाहिर करते हैं। भारत के राष्ट्रपति दिल्ली में झंडा फहराते हैं और राष्ट्रीय गान गाया जाता है। राजपथ में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जो अगले 3 दिनों तक चलता है। इस समारोह का समापन 29 जनवरी को बीटिंग द रीट्रीट फंक्शन के साथ होता है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर कई जगहों पर कविता-पाठ का आयोजन भी होता है। अगर आप भी इस अवसर पर शेयर करने के लिए कोई कविता ढूंढ़ रहे हैं तो यहां देखें –

1. हम आजादी के मतवाले,
झूमे सीना ताने।
हर साल मनाते उत्सव,
गणतंत्र का महजब़ जाने।
संविधान की भाषा बोले,
रग-रग में कर्तव्य घोले।
गुलामी की बेड़ियों को,
जब रावी-तट पर तोड़ा था।
उसी अवसर पर तो,
हमने संविधान से नाता जोड़ा था।
हर साल हम उसी अवसर पर,
गणतंत्र उत्सव मनाते हैं।।
पूरा भारत झूमता रहता है,
और हम नाचते-गाते हैं।
रायसीना की पहाड़ी से,
शेर-ए-भारत बिगुल बजाता है।
अपने शहीदों को करके याद,
पुनः शक्ति पा जाता है।।

2. नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं
पुते गालों के ऊपर
नकली भवों के नीचे
छाया प्यार के छलावे बिछाती
मुकुर से उठाई हुई मुस्कान मुस्कुराती
ये आंखें नहीं, ये मेरे देश की नहीं हैं…
तनाव से झुर्रियां पड़ी
कोरों की दरार से शरारे छोड़ती
घृणा से सिकुड़ी पुतलियां नहीं,
ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं…
वन डालियों के बीच से
चौंकी अनपहचानी कभी झांकती हैं वे आंखें,
मेरे देश की आंखें,
खेतों के पार मेड़ की लीक धारे
क्षिति-रेखा को खोजती
– अज्ञेय

3. कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे
हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से
तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे
बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,
चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे
परवाह नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,

है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे
उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे
तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे
सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका
चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे
दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे
मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम
आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे
– अशफाकउल्लाह खां

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