रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषा और लोकजीवन का भी महत्वपूर्ण आधार है। इस वक्त रामायण को लेकर काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, इसी नाम से एक बॉलीवुड फिल्म आने वाली है जिसका ट्रेलर कुछ समय पहले ही रिलीज हुआ।

रामायण की घटनाएं, पात्र और प्रसंग सदियों से लोगों की बोलचाल का हिस्सा बने हुए हैं। आज भी हम रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे कई मुहावरे और कहावतों को बोलते हैं, जिनका रिश्ता सीधे रामायण जैसे महाकाव्य से होता है। आइए डालते हैं एक नजर ऐसे कुछ मशहूर मुहावरों पर जो रामायण की देन हैं।

1-लक्ष्मण रेखा

आज के समय में लक्ष्मण रेखा हर तरह की मर्यादा और सीमा का प्रतीक बन चुका है। रामकथा के अनुसार, वनवास के दौरान लक्ष्मण ने माता सीता की सुरक्षा के लिए कुटिया के बाहर एक रेखा खींची थी, जिसे कोई पार नहीं कर सकता है। लेकिन जैसे ही माता सीता ने उस रेखा को पार किया साधु के वेश में रावण उनका हरण कर ले गया।

अर्थ: ऐसी सीमा जिसे पार नहीं करना चाहिए।

2- घर का भेदी लंका ढाए

रामायण के सबसे प्रसिद्ध मुहावरों और कहावतों में से एक घर का भेदी लंका ढाए भी है। इसका संबंध विभीषण से है, जिन्होंने अपने भाई रावण का साथ छोड़कर प्रभु श्रीराम का साथ दिया था और लंका की कई महत्वपूर्ण जानकारियों का खुलासा किया था। इसी के चलते जब भी कोई अपना धोखा देता है तो लोग रामायण इस कहावत को याद करते हुए कहते हैं कि घर का भेदी लंका ढाए।

अर्थ: जब अपना ही सगा अंदर की जानकारी देकर सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाए।

3- रामबाण उपाय

रामायण में भगवान राम का बाण अचूक माना गया है। उनका छोड़ा हुआ बाण अपने लक्ष्य को भेदकर ही लौटता था। इसी के चलते किसी ऐसे उपाय को, जो निश्चित रूप से सफल हो उसे रामबाण उपाय कहा जाने लगा।

अर्थ: ऐसा उपाय जो पूरी तरह सफल हो

4- अंगद का पैर

अंगद जब श्रीराम का शांति प्रस्ताव लेकर लंका गए तो उन्होंने रावण के भरे दरबार में अपना पैर जमा दिया और चुनौती दी कि यदि कोई उसे हिला दे, तो श्रीराम वापस लौट जाएं। रावण के बड़े-बड़े महारथी अंगद का पैर हिला नहीं सके। आज जब कोई निर्णय लेता है और अपनी बात पर अटल रहता है, लाख कोशिशों के बाद भी जब कोई फैसले से न हटे तो उसे ही अंगद का पैर कहा जाता है।

अर्थ: अपने निर्णय पर अटल रहना

5- वनवास काटना

श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था। भारतीय समाज में वनवास को संघर्ष, धैर्य और त्याग का प्रतीक माना जाता है। जब भी कोई व्यक्ति लंबे समय तक कठिन दौर से गुजरता है, तो कहा जाता है कि वनवास झेल रहा है।

अर्थ: कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक रहना।

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