श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त देश ही नहीं विदेश से भी पहुंचते हैं। लाखों श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन जाने का प्लान बनाते हैं। अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी मथुरा-वृंदावन में मनाने के लिए जाने का सोच रहे हैं तो सिर्फ मंदिरों की लिस्ट बना लेना काफी नहीं है।

इस दौरान भीड़ और विशेष पूजा की वजह से सामान्य दिनों से अलग तरीके से यात्रा प्लान करनी पड़ सकती है। इसलिए बेहतर रहेगा कि आप पहले ही प्लान बना लें कि आपको किस दिन कहां जाना है। अगर आपको पास सिर्फ दो दिन हैं तो 4 सितंबर 2026 को मथुरा और 5 सितंबर को वृंदावन जा सकते हैं। श्री बांके बिहारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट भी 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाए जाने की जानकारी दी गई।

पहला दिन: 4 सितंबर को मथुरा में रहें

सुबह-दोपहर: द्वारकाधीश मंदिर और विश्राम घाट

अगर आप 4 सितंबर की सुबह या दोपहर तक मथुरा पहुंच जाते हैं तो पहले द्वारकाधीश मंदिर और विश्राम घाट जा सकते हैं। यहां ज्यादा जगहें एक साथ कवर करने की कोशिश न करें। जन्माष्टमी की रात पर ज्यादा देर तक जगना होगा तो इसलिए दोपहर में होटल जाकर कुछ समय आराम करना बेहतर रहेगा।

शाम: जन्मभूमि क्षेत्र के लिए निकलें

शाम के समय श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए निकल सकते हैं। जन्माष्टमी की रात मुख्य आकर्षण आधी रात का जन्मोत्सव होता है। यहां एक जरूरी बात है—प्रवेश, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को सामान्य मंदिर टाइमिंग के आधार पर तय न करें। यात्रा वाले दिन प्रशासन और मंदिर की ताजा सूचना देखना जरूरी रहेगा।

रात: जन्मोत्सव के बाद मथुरा में ही रुकें

अगर आप जन्मभूमि में जन्मोसव देखना चाहते हैं तो 4 सितंबर की रात मथुरा में ही ठहर सकते हैं। रात में जन्मभूमि से निकलकर उसी समय वृंदावन जाने की कोशिश करने के बजाय अगले दिन आराम से वृंदावन जाना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है।

दूसरा दिन: 5 सितंबर को वृंदावन रखें

5 सितंबर को नंदोत्सव है और श्री बांके बिहारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी गई है। बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का कार्यक्रम बाकी दिनों से अलग होता है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 4 सितंबर को दिनभर सामान्य दर्शन के बाद रात 9:30 बजे शयन आरती होती है।

आधी रात में महाभिषेक होता है, जिसके बाद करीब 2 बजे से दर्शन शुरू होते हैं। सुबह 3:30 बजे मंगला आरती होती है और दर्शन लगभग सुबह 6 बजे तक चलते हैं। यह मंगला आरती साल में सिर्फ जन्माष्टमी के दिन होती है।

अगर आप इस विशेष दर्शन का अनुभव लेना चाहते हैं तो यह 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर की सुबह वाला कार्यक्रम है। छोटे बच्चों या बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो रातभर जागने वाले इस विकल्प को अपनी सुविधा के हिसाब से चुनें।

दूसरा प्लान: 5 सितंबर को दिन में वृंदावन दर्शन

जो लोग रात में बांके बिहारी की विशेष मंगला आरती के लिए नहीं रुकना चाहते, वे 5 सितंबर को दिन में वृंदावन के प्रमुख मंदिरों का दर्शन रख सकते हैं। शाम को प्रेम मंदिर जा सकते हैं। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सामान्य दिनों में यहां सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12 बजे और शाम 4:30 से रात 8:30 बजे तक दर्शन होते हैं। 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक म्यूजिकल और डिजिटल फाउंटेन का समय शाम 7:30 से 8 बजे बताया गया है।

लेकिन जन्माष्टमी और नंदोत्सव जैसे विशेष दिनों में भीड़ और प्रवेश व्यवस्था बदल सकती है, इसलिए 4-5 सितंबर के लिए सामान्य Timing को अंतिम मानकर न चलें।

2 दिन की यात्रा का आसान शेड्यूल

4 सितंबर — मथुरा

सुबह/दोपहर: द्वारकाधीश मंदिर → विश्राम घाट
दोपहर: होटल में आराम
शाम: श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र
रात: जन्मोत्सव → मथुरा में ठहराव

5 सितंबर — वृंदावन

रात में विशेष बांके बिहारी दर्शन करना हो तो 2 बजे से सुबह 6 बजे तक का स्लॉट ध्यान में रखें

दिन में: बांके बिहारी → इस्कॉन
शाम: प्रेम मंदिर
वैकल्पिक: गोकुल/नंदोत्सव, लेकिन तब वृंदावन के कुछ स्थान छोड़ने होंगे।