आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा…PM मोदी के ऐलान के बाद आई राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया, रखी शर्त

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। उनके इस फैसले के बाद अब राकेश टिकैत का भी ट्वीट आया है।

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पीएम नरेंद्र मोदी और किसान नेता राकेश टिकैत (File Photo)

कृषि कानूनों के विरोध में बीते एक साल से दिल्ली के बॉर्डर पर डटे किसानों की मेहनत सफल होती नजर आ रही है। दरअसल, मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने किसानों से क्षमा मांगते हुए इस बात का ऐलान भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि वह शायद किसानों को समझा नहीं पाए। बताया जा रहा है कि इस महीने के अंत में शुरू हो रहे संसद सत्र में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रकिया शुरू कर दी जाएगी। पीएम मोदी के इस फैसले पर अब भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का भी बयान आया है।

राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में कहा, “आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार एमएसपी के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें।” किसान नेता राकेश टिकैत के इस ट्वीट पर अब लोग भी खूब कमेंट कर रहे हैं, साथ ही किसानों को जमकर बधाइयां भी दे रहे हैं।

विजय राज शर्मा ने किसान नेता राकेश टिकैत के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “जय किसान। जो किसानों को आतंकवादी कहा जाता था, आज चुनाव में हार के डर से उसी किसान के आगे झुकी मोदी सरकार। किसान आतंकवादी नहीं है, किसान अन्नदाता है।” जय नाम के यूजर ने लिखा, “टूट गया अभियान, जीत गया मेरे देश का किसान। किसानों को आतंकवादी कहने वालों के मुंह पर कालिख पुत गई।”

वहीं विकास सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “हमें भावनाओं में नहीं बहना चाहिए, इनके शब्दों का कोई भरोसा नहीं है। यह व्यक्ति चीजों को पलटने में माहिल हैं। जब तक कानून को संसदीय सत्र में वापस नहीं लिया जाता है, किसानों को अपना आंदोलन यूं ही जारी रखना चाहिए।” बता दें कि कृषि कानूनों की वापसी पर राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया और लिखा, “देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सिर झुका दिया।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुपर्व के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा था कि वह किसानों को समझा नहीं पाए, इसीलिए कानून वापस ले लिए जाएंगे। हालांकि इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों का उद्देश्य पवित्र था और यह किसानों के हित में था।

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