घर वापसी हो जाए तो आपको हरी टोपी नहीं पहननी पड़ेगी- राकेश टिकैत से बोले एंकर, किसान नेता ने दिया ऐसा ज़वाब

किसान नेता राकेश टिकैत का सुदर्शन न्यूज़ के चेयरमैन सुरेश चव्हाणके के साथ इंटरव्यू वायरल हो रहा है। इसमें चव्हाणके कहते हैं, ‘घर वापसी हो जाए तो आपको हरी टोपी नहीं पहननी पड़ेगी।’

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किसान नेता राकेश टिकैत (Photo-PTI)

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर पिछले करीब 10 महीने से किसान संगठन दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हाल ही में एक बार फिर साफ कर दिया है कि जब तक केंद्र उनकी बात नहीं मानती वह आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। राकेश टिकैत का सुदर्शन न्यूज के चेयरमैन सुरेश चव्हाणके से साथ एक इंटरव्यू भी वायरल हो रहा है।

ओवैसी और बीजेपी का गठबंधन? इस इंटरव्यू में सुरेश चव्हाणके, राकेश टिकैत की हरी टोपी को लेकर सवाल पूछते हैं। यूपी चुनाव में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी को लेकर राकेश टिकैत कहते हैं, ‘ओवैसी और बीजेपी का अंदरखाने गठबंधन है। यही वजह है कि जहां-जहां बीजेपी जाती है, वहीं ओवैसी आ जाता है। गांव के लोग कहते भी हैं और सबको पता भी है कि ओवैसी बीजेपी का ‘चाचूजान’ है। ये हम नहीं कह रहे हैं, गांव के लोगों ने खुद हमें ऐसा कहा है।’

सुरेश चव्हाणके इसके जवाब में कहते हैं, ‘हम तो कहते हैं। आप ओवैसी के ‘चाचूजान’ हैं। ये तो उसकी तीसरी पीढ़ी है। इससे पहले तो वो हिंदू ही था। इस हिसाब तो आप उसके चाचा बने। राजनीति से अलग, आप उसके चाचा लगते हैं कि नहीं?’ राकेश टिकैत कहते हैं, ‘हमारा चाचूजान नहीं है वो, बीजेपी का चाचूजान है। हमें क्या मतलब है ओवैसी का विरोध करना का। यहां पर बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने धर्म परिवर्तन करवाया था।’

हरी टोपी पर क्या बोले टिकैत? सुरेश चव्हाणके कहते हैं, ‘अगर इन लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन करवाया है तो हम इनकी घर वापसी भी करवाएंगे। अगर कोई गया है तो उसे वापस लाने में क्या नुकसान है? धर्म परिवर्तन के बाद आपको जरूरी नहीं हरी टोपी पहननी पड़ेगी।’ राकेश टिकैत इसके जवाब में बोलते हैं, ‘ये टोपी किसी धर्म का प्रतीक नहीं है। बल्कि ये किसानों की पहचान है। इस्लाम का रंग गहरा हरा है, लेकिन हमारा हल्का हरा है।’

चव्हाणके कहते हैं, ‘जब तक गांव राम राज्य नहीं बनेगा। तब तक देश राम राज्य नहीं बनेगा। इस बात से तो आपको सहमत ही होना होगा।’ टिकैत जवाब में कहते हैं, ‘हम लोगों को ये पार्टियां थोड़ी ‘राम-राम’ कहना सिखाएंगी। गांव में हम हल चलाने से पहले भी राम-राम कहते थे और सुबह उठते भी राम-राम कहते थे।’

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