राजकुमारी रत्ना सिंह ने राजा भैया को उन्हीं के गढ़ में कर दिया था ‘पस्त’, 2019 में एक फैसले से सब रह गए थे दंग

राजकुमारी रत्ना सिंह कालाकांकर रियासत से ताल्लुक रखती हैं। भदरी और कालाकांकर राजघराने अक्सर राजनीति में आमने-सामने आ जाया करते हैं।

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राजकुमारी रत्ना सिंह और राजा भैया (फाइल फोटो)

Rajkumari Ratna Singh: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सगर्मियां बढ़ गई हैं। सूबे की सियासत में रियासतों-रजवाड़ों का अलग दबदबा रहा है। कभी बुंदेलखंड रियासत का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा समथर सिंह से लेकर रामपुर के नवाब और भदरी रियासत के राजा भैया ने यूपी की राजनीति में लंबा सफर तय किया है। प्रतापगढ़ और खासकर कुंडा में राजा भैया का भले ही एकतरफा दबदबा रहा हो, लेकिन एक समय ऐसा भी रहा जब जिले में कालाकांकर राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह के बढ़ते राजनीतिक रसूख ने राजा भैया को पशोपेश में डाल दिया था।

कौन हैं राजकुमारी रत्ना सिंह? प्रतापगढ़ में दो प्रमुख रियासतें हैं, भदरी और कालाकांकर। राजकुमारी रत्ना सिंह कालाकांकर रियासत से ताल्लुक रखती हैं। भदरी और कालाकांकर राजघराने अक्सर राजनीति में आमने-सामने आ जाया करते हैं। राजकुमारी रत्ना सिंह के परदादा कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनका परिवार शुरू से ही कांग्रेसी रहा है। साल 1959 में जन्मीं राजकुमारी रत्ना सिंह के पिता राजा दिनेश सिंह इंदिरा गांधी के काफी करीबी माने जाते थे और वो कांग्रेस की सरकार में विदेश मंत्री के पद पर भी रहे थे।

राजा भैया को उन्हीं के गढ़ में दी चुनौती: राजकुमारी रत्ना सिंह अपने पिता दिनेश सिंह की सियासी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। साल 1996 में वो पहली बार कांग्रेस के टिकट पर प्रतापगढ़ से चुनाव जीतकर संसद पहुंची थी, और दूसरी बार 1999 में भी संसद का सफर तय किया।

लेकिन साल 2004 में जब वे तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरीं तो प्रतापगढ़ के ही भदरी रियासत से ताल्लुक रखने वाले राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह से हार का सामना करना पड़ा था। राजकुमारी रत्ना ने साल 2009 में चौथी बार फिर इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीतने में कामयाब रहीं। हालांकि इसके बाद वे यहां से चुनाव नहीं जीत पाईं।


कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था: साल 2019 में राजकुमारी रत्ना सिंह ने एक फैसले से सबको चौंका दिया था। उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। खुद सीएम योगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। उस वक्त कहा गया था कि रत्ना सिंह के इस फैसले से कांग्रेस का आलाकमान और स्थानीय नेता खासे नाराज हो गए थे। क्योंकि खुद प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता उनके लिए प्रचार करने आते रहे थे। ऐसे में ये पार्टी के लिए बड़ा झटका था।

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