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प्रेग्नेंसी में आ रही दिक्कतें तो ले सकती हैं योग का सहारा, ये योगासन हो सकते हैं मददगार

योगा को हम शारीरिक और मासिक स्वास्थ्य बेहतर करने वाले एक्सरसाइज की तरह मानते हैं। यह सही है कि योगा करने से वजन कम होता है, शरीर में लचीलापन आता है और इससे बढ़ती उम्र के प्रभावों को रोका जा सकता है।

योग करने से शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त होता है। ऐसे में गर्भाशय को जाने वाले रक्त प्रवाह में ब्लॉकेज आने की वजह से प्रेग्नेंसी में रुकावट की समस्या योग से दूर की जा सकती है।

योगा को हम शारीरिक और मासिक स्वास्थ्य बेहतर करने वाले एक्सरसाइज की तरह मानते हैं। यह सही है कि योगा करने से वजन कम होता है, शरीर में लचीलापन आता है और इससे बढ़ती उम्र के प्रभावों को रोका जा सकता है। लेकिन इन सबके अलावा योग के माध्यम से प्रजनन क्षमता को भी बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसा एक्सपर्ट्स का मानना है। योग करने से महिलाओं को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। योग से शरीर और दिमाग दोनों को काफी फाया पहुंचता है और इससे तनाव से उबरने में मदद मिलती है। यह कॉन्सेप्शन की गारंटी तो नहीं होता लेकिन योग करने से आपकी प्रजनन क्षमता पर बेहतर प्रभाव पड़ता है। आइए, जानते हैं कैसे –

फर्टिलिटी पर योग का प्रभाव – योग विज्ञान में हर शारीरिक समस्या का इलाज मौजूद होता है। इसमें शरीर के हर अंग के लिए कोई न कोई व्यायाम मौजूद है। योग करने से शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त होता है। ऐसे में गर्भाशय को जाने वाले रक्त प्रवाह में ब्लॉकेज आने की वजह से प्रेग्नेंसी में रुकावट की समस्या योग से दूर की जा सकती है। इसके लिए कपोतासन काफी लाभदायक होता है। योग से रक्त प्रवाह बढ़ने की वजह से प्रजनन अंगों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचता है। इससे आपकी प्रजनन क्षमता बढ़ती है। इन सबके अलावा योग से एंडोक्राइन सिस्टम रिसेट होने में मदद मिलती है जो हार्मोन्स के असंतुलन को रोकने में सहायक होती है।

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कौन-कौन से आसन हैं फायदेमंद –

1. भ्रामरी प्राणायाम और पश्चिमोत्तासन दिमागी चिंता, तनाव आदि को दूर करने का काम करते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी का राह में आने वाली मनोवैज्ञानिक बाधाओं को दूर करने में ये आसन मददगार होते हैं।

2. फर्टिलिटी के लिए भुजंगासन के ढेर सारे फायदे होते हैं। इसे करने से ओवरीज और यूटेरस तक रक्त की आपूर्ति ठीक ढंग से होने लगती है। इसके अलावा यह हार्मोन्स में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। भुजंगासन सर्वाइकल म्यूकस के निर्माण को बढ़ाने का काम करता है जिसकी वजह से शुक्राणु आसानी से अंडों तक पहुंच पाते हैं।

3. सेतुबंधासन करने से इन्फर्टिलिटी के लिए जिम्मेदार कारणों को दूर करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा विपरीतकरणी आसन करने से संबंध बनाने के दौरान शुक्राणुओं को गर्भाशय तक पहुंचने में आसानी होती है।

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