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प्रेग्नेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या क्यों होती है, जानिए जरूरी बातें

Morning sickness: लगभग हर महिला मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव करती हैं। हालांकि यह समस्या नुकसान नहीं पहुंचाती है लेकिन यदि अधिक होने लग जाए तो इसका इलाज करवाना चाहिए।

मॉर्निंग सिकनेस (Source: Dreamstime)

Morning Sickness Problems: मॉर्निंग सिकनेस प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली एक आम समस्या होती है। लगभग सभी महिलाएं निश्चित रूप से मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव करती हैं। मॉर्निंग सिकनेस के कारण महिलाओं को मिचली और उल्टी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं को शाम में इस समस्या का अनुभव होता है। हालांकि यह समस्या हानिकारक नहीं होती है, लेकिन इसके कारण महिलाओं को कई परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही असहजता भी महसूस होती है। यदि जरूरत से ज्यादा कोई महिला इस समस्या से परेशान है तो समय रहते इसकी जांच करवानी चाहिए।

मॉर्निंग सिकनेस क्या है?
कई महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस के कारण गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। हाइपरमेसिस ग्रेविडरम के कारण लगातार महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस का अनुभव करना पड़ता है । इसमें उल्टी, मिचली और पेट में दर्द होता है। कई बार इन समस्याओं के कारण महिलाओं को अस्पताल भी जाने की जरूरत पड़ जाती है। अत्यधिक मॉर्निंग सिकनेस होने के कारण बच्चे को भी नुकसान पहुंचने का खतरा हो जाता है।

मॉर्निंग सिकनेस का कारण क्या है?
यह स्थिति कई कारकों के कारण हो सकती है जैसे कि एचसीबी का स्तर बढ़ जाना। एचसीबी का अर्थ है ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन। यह एक तरह का हार्मोन है। यह गलत खानपान या शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण भी हो सकता है।

हाइपरमेसिस ग्रेविडरम के लक्षण:

1. अधिक मिचली महसूस करना
2. डिहाईड्रेशन
3. वजन घटना
4. बेहोशी और सिरदर्द होना
5. लो ब्लड प्रेशर
6. लगातार पेशाब आना
7. तेज धड़कन हो जाना

यह शिशु को कैसे प्रभावित करता है?
यह आमतौर पर बच्चे को प्रभावित नहीं करता है लेकिन अगर यह स्थिति बनी रहती है तो यह बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह बच्चे के वजन और उसके विकास को प्रभावित कर सकता है।

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