प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में डेंगू हो जाए तो क्‍या करें? एक्सपर्ट्स से जानिए कैसे करें बचाव

गर्भावस्था में डेंगू बुखार काफी खतरनाक साबित हो सकता है। जीका वायरस की तरह इससे बच्‍चे का शारीरिक या मानसिक विकास प्रभावित नहीं होता है।

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पसंदीदा भोजन से मन ऊबना और रात के समय ज्यादा पेशाब लगना भी प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं (Photo-Freepik)

देश की राजधानी दिल्‍ली से लेकर हर बड़े-छोटे शहरों में इन दिनों डेंगू का बुखार चरम पर है। बड़े- बुजुर्गों के बाद डेंगू मच्छर ने बच्चों को अपना शिकार बनाना शुरू किया है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में भी डेंगू संक्रमण के मामले पाए जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि प्रेग्नेंट महिलाओं को डेंगू का बुखार होता है तो मां के साथ साथ बच्‍चा भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंसी में डेंगू कितना खतरनाक है या प्रेग्नेंसी में महिलाओं को डेंगू हो जाये तो क्या करें जैसे जरूरी सवालों का जवाब जानने के लिए हमने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ विशेषज्ञ डॉक्‍टर प्रणाली आहाले से खास बातचीत की है। आइए जानते हैं डॉक्‍टर प्रणाली से कि अगर गर्भावस्था के दौरान किसी महिला को डेंगू हो जाए तो क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं?

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रणाली अहाले ने Jansatta.com से बातचीत में बताया कि डेंगू बुखार एक मच्छर के काटने से फैलता है जो डेंगू वायरस से संक्रमित होता है। गर्भावस्था के दौरान डेंगू बुखार होने से मां और गर्भ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इसके साथ मातृ मृत्यु का जोखिम अधिक बढ़ जाता है।

वहीं पहली तिमाही के दौरान यही गर्भवती महिलाओं में संक्रम होता है तो उनमें गर्भपात का खतरा बढ़ जाता। जब अंतिम तिमाही में संक्रमण होता है, तो डेंगू का असर बच्‍चे में कई तरह से दिख सकता है जैसे कि जन्म के समय कम वजन, समय से पहले प्रसव (Premature Delivery) और वर्टीकल ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ सकता है।

लक्षण: डॉ. आहाले ने लक्षणों के बारे में बात करते हुए बताया कि डेंगू के सामान्य लक्षण जैसे कि बुखार, शरीर में दर्द, जोड़ों का दर्द, उल्टी, पेट दर्द बुखार, सिर में दर्द, रैशेज, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द होना और प्‍लेटलेट्स का तेजी से कम होना जैसे लक्षण ही गर्भवती महिलाओं में दिखते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग: डॉक्टर के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग में इन्फेक्शन कम बल्कि हेल्थ बेनिफिट्स की संभावना अधिक होती है। डॉक्‍टर कहती हैं कि बल्कि हम मां को बच्‍चे को दूध पिलाने की सलाह देते हैं क्‍योंकि इसमें एंटीडेंगू एंटीबॉडी भी होते हैं इससे दूध में मौजूद एंटीबॉडीज बच्‍चे को इंफेक्‍शन से बचाते हैं।

बचाव: डॉक्टर प्रणाली आहाले के मुताबिक ऐसी जगह जाने से बचें जहां पर डेंगू का बुखार फैला हुआ है। इसके अलावा पूरे बाजू के कपड़े पहनें, मच्‍छरदानी का प्रयोग करें और खुद को ज्‍यादा से ज्‍यादा सुरक्षित रखें, मच्छर मारक दवाइयों का इतेमाल करें, दरवाजे- खिड़कियों को बंद करके रखें। वहीं दवाइयों को लेकर डॉक्‍टर कहती हैं कि गर्भावस्था में डेंगू में बुखार होने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें और उनकी सलाह पर ही कोई दवा लें, अपनी मर्जी से कोई दवा न लें नहीं तो साइड इफेक्‍ट होने का डर रहता है। जल्द ठीक होने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखें। इसके लिए नारियल पानी, जूस, छाछ और पानी आदि पीते रहें।

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