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प्रेग्नेंसी के दौरान मां की बीमारियों की वजह से बच्चों में आ सकती हैं ये दिक्कतें

प्रेग्नेंसी के पहले, बाद में और उसके दौरान मां की सेहत का होने वाले बच्चे पर दीर्घकालिक प्रभाव रहता है।
प्रतीकात्मक चित्र

प्रेग्नेंसी के दौरान एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए सिर्फ भ्रूण की देखभाल संबंधी सावधानियां बरतने से उसकी पूरी सुरक्षा संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि मां की सेहत का भी उतना ही ख्याल रखा जाए। अक्सर ऐसा देखा गया है कि प्रेग्नेंसी के पहले, बाद में और उसके दौरान मां की सेहत का होने वाले बच्चे पर दीर्घकालिक प्रभाव रहता है। इसलिए जरूरी है कि प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी जीवनशैली अपनाई जाए जिससे होने वाले बच्चे की सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़े। प्रेग्नेंसी के दौरान शराब, स्मोकिंग आदि का सेवन तो बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता ही है, इसके साथ ही कुछ ऐसी बीमारियां भी होती हैं जो बच्चों का सेहत को बुरा प्रभावित करती हैं।

एनीमिया – अधिकांश प्रेग्नेंट महिलाओं में एनीमिया की शिकायत देखने को मिलती है। गर्भावस्था के दौरान मां को एनीमिया की समस्या होने पर बच्चे के कम वजन के साथ पैदा होने की समस्या होती है। एनीमिया की वजह से मां से भ्रूण तक कम मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच पाता है जिससे भ्रूण का विकास ठीक से नहीं हो पाता है।

हाइपरटेंशन – गर्भावस्था में हाइपरटेंशन की समस्या भी एक गंभीर मसला है। इस दौरान गर्भनाल की रक्तवाहिनियां टाइट हो जाती हैं। जिस वजह से भ्रूण तक रक्त और अन्य पोषक तत्व बेहद ही सीमित मात्रा में पहुंच पाते हैं। इससे बच्चे में अंतःगर्भाशयी विकास में कमी, लो ब्लड शुगर, लो बर्थ वेट और लो मशल्स की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

मोटापा – गर्भावस्था के दौरान मोटापे से पीड़ित मां के होने वाले बच्चे में मोटापा और डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

डायबिटीज – गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज श्वांस संबंधी रोगों का कारण हो सकती है। इसकी वजह से बच्चे में मोटापा, दिल की समस्या और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

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