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प्रेग्नेंसी में सीधे सोना हो सकता है खतरनाक, जानिए क्यों

गर्भावस्था के शुरुआती दौर में आप किसी भी तरह से सो सकती हैं लेकिन 16 हफ्ते बीत जाने के बाद आपको ध्यान देना है कि आप पीठ के बल न सोएं।

प्रतीकात्मक चित्र (Freepik.com)

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को तमाम तरह की दिक्कतें उठानी होती हैं। हार्मोनल बदलावों की वजह से मानसिक दिक्कतें तो होती ही हैं साथ ही कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी उन्हें लगातार परेशान करती रहती हैं। गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा की दृष्टि से तमाम तरह के सुझाव और सलाह लोग गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इसमें उनके सोने, उठने तथा बैठने के तरीके शामिल हैं। बहुत सी गर्भवती महिलाओं का यह सवाल है कि गर्भावस्था में किस तरह से सोया जाए। दरअसल, गर्भावस्था के शुरुआती दौर में आप किसी भी तरह से सो सकती हैं लेकिन 16 हफ्ते बीत जाने के बाद आपको ध्यान देना है कि आप पीठ के बल न सोएं। यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

पीठ के बल सोना खतरनाक क्यों है – गर्भावस्था के दो महीने के बाद गर्भ में पल रहे शिशु का ठीक-ठाक वजन हो जाता है। ऐसे में जब आप पीठ के बल लेटती हैं तो शिशु आपके शरीर के निचले हिस्से से दिल तक रक्त पहुंचाने वाली नस पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में आपको बेहोशी आ सकती है। या फिर आपको नींद आने जैसा महसूस हो सकता है। हालांकि, यह बहुत ज्यादा देर तक पीठ के बल लेटे रहने से होता है। इसलिए,कोशिश करें कि गर्भावस्था के 16 हफ्तों के बाद पीठ के बल न सोएं बल्कि सोने के लिए सही पोजिशन का इस्तेमाल करें।

क्या है सोने की सही पोजिशन – डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक गर्भावस्था में बायीं तरफ करवट लेकर सोना सबसे सही पोजिशन होता है। इससे शिशु का बेहतर विकास होता है। साथ ही आपके शरीर को ज्यादा आराम मिलता है। बायीं ओर करवट लेकर सोने से आपके गर्भनाल से आपके शिशु को सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। साथ ही आपका रक्त प्रवाह भी दुरुस्त बना रहता है। इस तरह से सोने का एक और फायदा है। इससे आपके शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त तत्व भी बाहर निकल जाते हैं और आप कई तरह के संक्रमण आदि से बच जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में आराम भी बहुत जरूरी है। इस दौरान कम से कम 7-9 घंटे की नींद जरूरी है।

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