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संबंध बनाने, व्यायाम या तनाव की वजह से नहीं होता गर्भपात, गलत हैं अबॉर्शन से जुड़े ये मिथक

बहुत से लोगों का कहना होता है कि गर्भावस्था के दौरान तनाव, व्यायाम या फिर ज्यादा आहार लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है

Author Published on: December 12, 2017 9:51 PM
संतुलित आहार और शारीरिक अभ्यास तो बच्चे के विकास पर अच्छा प्रभाव डालते हैं।

बहुत से लोगों का कहना होता है कि गर्भावस्था के दौरान तनाव, व्यायाम या फिर ज्यादा आहार लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है, जबकि इसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है। संतुलित आहार और शारीरिक अभ्यास तो बच्चे के विकास पर अच्छा प्रभाव डालते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान कच्चा पपीता और अनानास नहीं खाना चाहिए और ज्यादा कठिन व्यायाम भी नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा भी गर्भपात को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां लोगों के बीच फैली हुई हैं जो लोगों के लिए निरर्थक चिंता का कारण बनती हैं। तो चलिए हम जानते हैं कि गर्भपात को लेकर ऐसे कौन-कौन से मिथक हैं और उनकी सच्चाइ क्या है?

शारीरिक संबंध बनाने से गर्भपात – प्रेग्नेंसी में शारीरिक संबंध बनाने से गर्भपात नहीं होता है। गर्भपात सामान्यतः गुणसूत्रीय अनियमितताओं या फिर हार्मोंस प्रॉबल्म्स की वजह से होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव, व्यायाम या फिर सेक्स का गर्भपात में कोई हाथ नहीं होता। इसलिए जब तक आपको डॉक्टर शारीरिक संबंध बनाने से मना नहीं करते तब तक इसमें कोई दिक्कत नहीं है।

तनाव भी नहीं है कारण – गर्भावस्था में तनावपूर्ण रहने से गर्भपात होने का कोई प्रमाण नहीं है। इस वजह से बच्चे के विकास पर जरूर असर पड़ता है लेकिन गर्भपात नहीं होता। इस विषय पर किसी भी तरह का शोध भी नहीं हुआ है।

अबॉर्शन करवाने के बाद – बहुत से लोगों ऐसा सोचते हैं कि अगर आपने पहले कभी गर्भपात करवाया है तो बाद में आपको गर्भपात हो सकता है। इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। गर्भपात करवाने के बाद भी सामान्य गर्भधारण और प्रसव हो सकता है।

गर्भावस्था के शुरुआत में स्राव – गर्भावस्था की शुरुआत में रक्त-स्राव होने को बहुत सी महिलाएं गर्भपात का संकेत मान लेती हैं, जबकि यह स्राव सामान्य है। तकरीबन 40 फीसदी ऐसे मामलों में लोग इसे गर्भपात का लक्षण मान लेते हैं।

कम्प्यूटर रेडिएशन भी नहीं जिम्मेदार – बहुत सी महिलाएं ऐसा मानती हैं कि कंप्यूटर के रेडिएशन की वजह से गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ता है। इससे गर्भपात भी हो सकता है। इस बात में भी कोई सच्चाई नहीं है। इस विषय पर किसी तरह का शोधपत्र भी उपलब्ध नहीं है जिससे इस बात की तस्दीक की जा सके।


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