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प्रेग्नेंट महिलाओं को दी जाती है रोजाना इतने घंटे सोने की सलाह

प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए एक कठिन वक्त की तरह होता है। इस दौरान उनमें कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आ रहे होते हैं।

प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए एक कठिन वक्त की तरह होता है। इस दौरान उनमें कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आ रहे होते हैं। इस दौरान उनके गर्भ में एक जीवन पल रहा होता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं में लगातार थकान का बने रहना, भावनात्मक तनाव, मॉर्निंग सिकनेस तथा नींद संबंधी समस्याएं देखी जाती हैं। दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को ज्यादा सोना चाहिए। इस दौरान बच्चे तक खून की आपूर्ति कराने के लिए आपके दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी होती है। ऐसे में थकान होना लाजिमी है। इसलिए, थकान महसूस होने पर आपको तुरंत नींद लेनी चाहिए। डॉक्टर्स के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को दिनभर में कम से कम 8 घंटे जरूर सोना चाहिए।

गर्भावस्था में महिलाओं के सोने का वक्त उनके स्टेज ऑफ प्रेग्नेंसी पर निर्भर करता है। मतलब कि उनकी प्रेग्नेंसी किस अवस्था में है। गर्भावस्था की पहली तिमाही में बहुत सुस्ती होती है। इसका कारण शरीर में प्रोजेस्टेरॉन का स्तर बढ़ जाना होता है। यह भ्रूण के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। इस दौरान आपका मेटाबॉलिज्म भी बदलता है जिससे आपको बार-बार नींद आती है। यह नींद बार-बार कई वजहों से टूटती भी है। दूसरी तिमाही में आपको पर्याप्त नींद लेने की जरूरत है। इस दौरान आपको हल्के प्रभावों वाले एक्सरसाइजेस भी करने की सलाह दी जाती है। दूसरी तिमाही में आपको बायीं ओर से सोने की कोशिश करनी चाहिए।

तीसरी तिमाही आपके लिए काफी मुश्किलों भरा हो सकता है। इस दौरान पेट का आकार बढ़ जाता है। ऐसे में सोने में काफी दिक्कत आती है। कई तरह की रुकावटें भी आपके सोने में बाधा बन जाती हैं। जैसे – इस दौरान सीने में जलन तथा बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या होने लगती है। इन सबके बावजूद आपको तीसरी तिमाही में अतिरिक्त नींद लेने की जरूरत होती है। जब भी आपको सुस्ती महसूस हो या नींद आए तुरंत सो लें। साथ ही सोने से पहले नियंत्रित मात्रा में फ्लूड्स का सेवन करें। इससे बार बार पेशाब जाने की समस्या नहीं होगी। सीने में जलन से निजात पाने के लिए आपको मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए।

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