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तो इसलिए प्रेग्नेंसी में नहीं खानी चाहिए पैरासिटामोल, बच्चे को पहुंच सकता है नुकसान

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपना खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। गर्भवती महिलाओं को पैरासिटामोल का सेवन करने से बचना चाहिए वरना गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान पेन किलर का सेवन ना करें

प्रेग्नेंसी के दौरान एक गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है क्योंकि मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का ध्यान भी रखना होता है। गर्भावस्था के दौरान अपने खान-पान और जीवनशैली का खास ध्यान रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि एक छोटी सी गलती आपके बच्चे के सेहत को प्रभावित कर सकती है। हमेशा स्वस्थ और पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए ताकि बच्चे को सही पोषण मिल सके। गर्भावस्था के दौरान दवाइयों का सेवन करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क कर लेनी चाहिए। यदि आप गलत दवाइयों का सेवन करते हैं तो मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल का सेवन बच्चे में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर(एडीएचडी) के खतरे को बढ़ा देता है। एक शोध के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पेन किलर का सेवन ऑटिज्म के खतरे को भी बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाएं सिरदर्द के लिए पेन किलर्स का सेवन करती हैं। इसलिए उन महिलाओं के बच्चे को एडीएचडी होने की संभावना अधिक होती है जो गर्भावस्था के दौरान पेन किलर्स का सेवन करती हैं।

एक अध्ययन में, गर्भावस्था के 18 से 32 सप्ताह के बीच एसिटामिनोफेन लेने से बच्चों में व्यवहार समस्याओं की 42 प्रतिशत वृद्धि हुई और 31 प्रतिशत अति सक्रियता के जोखिम में वृद्धि हुई है। पैरासिटामोल को एसिटामिनोफेन भी कहते हैं और यह गर्भ में हार्मोन डिसरप्टर के रूप में कार्य करता है। इससे मानसिक स्थिति भी खराब होती है। एसिटामिनोफेन मां के हार्मोन स्तर को फेरबदल कर के भ्रूण मस्तिष्क विकास को प्रभावित करता है।

एडीएचडी के दौरान लोग अधिक बेचैनी और अति सक्रियता महसूस करने लगते हैं। इसलिए यदि आप अपने बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना चाहती हैं तो आपको पैरासिटामोल और अन्य पेन किलर्स के सेवन से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

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