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प्रेग्नेंसी में पेन किलर्स का सेवन बच्चे की प्रजनन क्षमता पर डालता है बुरा असर

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में इस बात का दावा किया है कि गर्भावस्था में महिलाएं अगर पेन किलर्स लेती हैं तो इससे उनके होने वाले बच्चे की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
प्रतीकात्मक चित्र

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में इस बात का दावा किया है कि गर्भावस्था में महिलाएं अगर पेन किलर्स लेती हैं तो इससे उनके होने वाले बच्चे की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। ‘इनवायरमेंटल हेल्थ पर्सस्पेक्टिव’ पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं के पेन किलर्स के सेवन से उनके अजन्मे लड़के व लड़कियों दोनों की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। शोध में यह भी कहा गया है कि यह डीएनए पर असर डालता है। ऐसे में पैरासिटामॉल सहित कुछ दवाओं का इस्तेमाल गर्भावस्था में सावधानी से करना चाहिए।

प्रमुख शोधकर्ता का कहना है कि पेनकिलर के इस्तेमाल से बच्चे में विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इससे महिलाओं में जल्द मीनोपॉज का खतरा भी रहता है। दर्द की दवाएं अंडाशय में अंडों का उत्पादन तेजी से करने लगती हैं। ऐसे में जब अंडाशय खाली हो जाता है तो मीनोपॉज का खतरा बढ़ जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक गर्भावस्था में तकरीबन पचास प्रतिशत महिलाएं सिरदर्द से राहत पाने के लिए पेन किलर्स का इस्तेमाल करती हैं। इससे गर्भस्थ शिशु में बनने वाले शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा ऐसे शिशुओं के जीवन के अंतिम दिनों में टेस्टीकल कैंसर का भी काफी खतरा होता है।

गर्भावस्था के दौरान एक समय में एक से ज्यादा और अलग-अलग तरह की दर्द निवारक दवाएं ली जाएं तो ऐसी महिलाओं के बेटों में नपुंसकता का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। यदि आप गर्भावस्थां के चार से छह महीने के बीच हैं तो आपको कम से कम दर्दनिवारक दवाएं लेनी चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के इस समय में दर्दनिवारक दवाएं लेना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। गर्भावस्था के 4 से 6 महीने के बीच केवल एक दर्द निवारक दवा लेने से भी सामान्य महिलाओं के मुकाबले इन महिलाओं के बच्चों में विकृति का खतरा दोगुना हो जाता है। दर्द निवारक दवाओं से भ्रूण के विकास में बाधा होती है और यह खतरा पैरासीटामोल में जहां दोगुना होता है वहीं एस्प्रिन या आईबूप्रोफेन से चार गुना तक बढ़ जाता है।

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