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शोध का दावा, मोटापे से ग्रस्त लोगों की प्रेग्नेंसी में होती है देरी, जानें वजह

हाल ही में एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि अगर कोई दंपति मोटापे से ग्रस्त है तो उन्हें देर से बच्चा होने की संभावना बढ़ जाती है।

शोध के नतीजों में यह पाया गया कि जिन लोगों का बीएमआई अधिक था उन्हें प्रेग्नेंट होने में काफी वक्त लगा।

मोटापे से ग्रस्त लोगों के कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त होने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे लोगों में जोड़ों के दर्द, थकान, हाई कोलेसट्रॉल, हाइपरटेंशन और दिल संबंधी बीमारी होने की संभावना होती है। मोटापा इन बीमारियों की एक तरह से जड़ होती है। कोई भी व्यक्ति हार्मोनल असंतुलन, ज्यादा खाना खाने, असंतुलित खान-पान की वजह से मोटापे का शिकार हो सकता है। हाल ही में एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि अगर कोई दंपति मोटापे से ग्रस्त है तो उन्हें देर से बच्चा होने की संभावना बढ़ जाती है।

नेशनल हेल्थ इंस्टिट्यूट की ओर से कराए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। इंस्टिट्यूट ने उन जोड़ों पर यह परीक्षण किया था जिनमें पति-पत्नी दोनों मोटापे से ग्रस्त थे। शोध में पाया गया कि तकरीबन 59 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त जोड़ों के बच्चा होने में उन लोगों के मुकाबले काफी देरी हुई जो लोग फिट थे। शोधकर्ताओं ने बच्चा पैदा करने की कोशिश करने वाले लोगों पर यह शोध किया था। शोध में शामिल लोगों को दो भागों में बांटा गया था। पहले ग्रुप में वे लोग शामिल थे जिनका बॉडी-मास इंडेक्स 35 था तथा दूसरे ग्रुप में उन लोगों को रखा गया था जिनका बीएमआई 20-30 के बीच में था।

शोध के नतीजों में यह पाया गया कि जिन लोगों का बीएमआई अधिक था उन्हें प्रेग्नेंट होने में काफी वक्त लगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर फर्टिलिटी की बात की जाए तो शरीर में जमा फैट इसमें अहम भूमिका निभाता है। शोधकारों के मुताबिक जब शरीर में ज्यादा मात्रा में फैट इकट्ठा हो जाता है तब प्रजनन के लिए जिम्मेदार कुछ हार्मोन्स ठीक तरह से काम नहीं करते। इससे महिलाओं के अंडाणुओं तथा पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी आती है। इस वजह से प्रेग्नेंसी में देरी होती है। ऐसे में यह कहा गया कि मोटापे से ग्रस्त जोड़ों में बच्चा होने की प्रक्रिया काफी लंबे समय में पूरी होती है।

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