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इन पांच वजहों से जरूर करना चाहिए नवजात शिशुओं का नियमित मसाज

घर में नवजात शिशु का आना नई जिम्मेदारियों की आमद होती है। बच्चे की सेहत को लेकर मां को काफी सतर्क रहना पड़ता है।
प्रतीकात्मक चित्र

घर में नवजात शिशु का आना नई जिम्मेदारियों की आमद होती है। बच्चे की सेहत को लेकर मां को काफी सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे मौके पर बच्चों की देखभाल को लेकर सलाह देने वाले लोगों का भी तांता लगा रहता है। ऐसे लोगों में ज्यादातर लोग बच्चे की मालिश करने को लेकर सुझाव जरूर देते हैं। पुराने समय से नवजात शिशु का मसाज करना उसकी सेहत को लेकर किए जा रहे कवायदों में सबसे सामान्य प्रक्रिया होती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नवजात के मसाज से किस तरह से हेल्थ बेनेफिट्स होते हैं। आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करेंगे।

मसाज से नवजात को मिलने वाले फायदे

1. पर्याप्त नींद – नवजात शिशु के वृद्धि और विकास के लिए जरूरी है कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में नींद ले। विशेषज्ञों का कहना है कि रेगुलर मसाज से बच्चा बेहतर, गहरी और लंबी नींद ले सकता है, इसलिए नवजात शिशु का नियमित मसाज बेहद जरूरी है।

2. पाचन – नियमित रूप से मसाज करने से नवजात की पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रहती है। बहुत से नवजात ऐसे होते हैं जिनमें गैस संबंधी समस्या होती है। इस वजह से वे काफी परेशान रहते हैं। नियमित रूप से मसाज करने से नवजातों में गैस संबंधी विकारों से होने वाले दर्द आदि से निजात मिलता है। ऐसे में नियमित मसाज करके बच्चे को अनावश्यक दवाओं के सेवन से बचाया जा सकता है।

3. रक्त संचार दुरुस्त करने में – वयस्क लोगों के गतिशील रहने की वजह से उनमें रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में कोई दिक्कत नहीं आती। नवजात ज्यादा गतिशील नहीं रहते। ऐसे में नियमित मसाज उनके रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मददगार होते हैं। तमाम अध्ययनों में यह कहा गया है कि मसाज करने से नवजातों के शरीर के अंग तेजी से विकसित होते हैं। उनके शारीरिक विकास के लिए यह एक आवश्यक प्रक्रिया है।

4. तनाव होता है कम – मसाज केवल हमारे ही तनाव को दूर करने का काम नहीं करता बल्कि यह नवजातों के शरीर की मांसपेशियों को आराम दिलाकर तनाव मुक्त रखता है।

5. भावनात्मक बंध बनाने में भी मददगार – मसाज से नवजात को केवल शारीरिक रूप से ही फायदा नहीं पहुंचता बल्कि इससे उसका मां के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होता है। यही वह वक्त होता है जब मां अपने बच्चे से भावनात्मक बंध को मजबूती देती है।


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