ताज़ा खबर
 

जेनिटल टीबी से महिलाओं को मां बनने में परेशानी, जानिए इसके लक्षण

आईसीएमआर की हालिया रिपोर्ट में सामने आया कि आईवीएफ ट्रीटमेंट करवाने वाली 50 प्रतिशत महिलाएं जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस से ग्रसित हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस (टीबी) की बीमारी महिलाओं के गर्भधारण नहीं कर पाने का एक मुख्य कारण है। मेडिकल की भाषा में कहा जाए तो जेनिटल टीबी महिलाओं में इन्फर्टिलिटी की समस्या को जन्म देता है। अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह शरीर के अन्य अंगों जैसे की दिमाग, किडनी, पेल्विक एरिया के गर्भाशय और फलोपियन ट्यूब पर बुरा प्रभाव छोड़ता है।

इसी बीमारी से ग्रसित 32 वर्षीय बबीता गुप्ता (बदला हुआ नाम) शादी के तीन साल बाद भी बच्चे को जन्म नहीं दे पा रही हैं। उन्होंने मां बनने के लिए हर संभव प्रयास भी किया जैसे कि हॉर्मोनल थेरेपी और कई तरह की दवाओं का सेवन। जिसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित एक क्लीनिक में एमेनोरिया (एक या अधिक मासिक चक्र में मासिक स्राव की अनुपस्थिति) का इलाज भी करवाया। डॉक्टर ने विस्तृत जांच की तो पाया कि बबीता शादी से पहले ही पुल्मोनारी ट्यूबरक्लोरसिस से ग्रसित हैं। इस दौरान डॉक्टर ने जांच में यह भी पाया कि बबीता की फैलोपियन ट्यूब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त थी। जिसके बाद डॉक्टर ने एंटी-टीबी ट्रीटमेंट (एटीटी) के जरिए उनका इलाज शुरू किया।

इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर सागरिका अग्रवाल ने बताया कि जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस का इन्फेक्शन पेट के जरिए शरीर के निचले अंगों में फैलता है। जेनिटल टीबी महिलाओं में इन्फर्टिलिटी की समस्या का मुख्य कारण है। इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता नहीं चल पाता और जब बाद में पता चलता है तो काफी देर हो चुकी होती है।

सागरिका की बात पर मेदांता अस्पताल के यूरोलॉजी और एंड्रोलॉजी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर अमिता जैन ने भी सहमति जाहिर की. उन्होंने कहा जेनिटल टीबी से ग्रसित महिला को मासिक धर्म की अनियमितता, दर्दनाक मासिक धर्म प्रवाह और असामान्य योनि स्राव की शिकायत रहती है। जो कि महिलाओं के प्रजनन काल (15 से 45 वर्ष) में बेहद नुकसानदायक होती है।

डॉक्टर सागरिका अग्रवाल ने बताया कि आईसीएमआर की हालिया रिपोर्ट में सामने आया कि आईवीएफ ट्रीटमेंट करवाने वाली 50 प्रतिशत महिलाएं जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस से ग्रसित हैं। 95 प्रतिशत केस में देखा गया कि इन्फेकशन महिलाओं के फलोपियन ट्यूब तक पहुंच गया था तो 50 प्रतिशत केस में गर्भाश्य के अंदरूनी हिस्से में जबकि 30 प्रतिशत केस में अंडाशय तक इन्फेकशन फैल चुका होता
है। दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्र पर आधारित इस डाटा के मुताबिक, जेनिटल टीबी से ग्रसित पांच में से प्रत्येक एक महिला बच्चे को जन्म देने में सक्षम नहीं है।

वहीं शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के पुल्मोनॉजी विभाग के डॉक्टर विकास मौर्य ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस न सिर्फ महिलाओं बल्कि पुरुषों में बांझपन का एक मुख्य कारण है। यह पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि, एपिडीडिमिस और वृषण को नुकसान पहुंचाता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App