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प्रेग्नेंसी ही नहीं इन 10 कारणों से भी पीरियड्स आने में होती है देरी

पीरियड्स के मिस हो जाने का मतलब हर बार प्रेग्नेंसी नहीं होता। कई बार इसके लिए दूसरे कारक भी जिम्मेदार होते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र (Freepik.com)

पीरियड्स के मिस हो जाने का मतलब हर बार प्रेग्नेंसी नहीं होता। कई बार इसके लिए दूसरे कारक भी जिम्मेदार होते हैं। तनाव, बुखार, गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल, मोटापा आदि कुछ ऐसी ही वजहें हैं। इनके अलावा भी कई ऐसी वजहें हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते लेकिन ये पीरियड मिस्ड होने के लिए जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते हैं कि वे वजहें कौन-कौन सी हैं।

1. स्ट्रेस या फिर तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को कई तरीकों से प्रभावित करता है। पीरियड्स में देरी उन्हीं प्रभावों में से एक है। तनाव अंडोत्सर्ग के लिए जिम्मेदार हार्मोन जीएनआरएच के स्राव को कम कर देता है जिससे मासिक धर्म की प्रक्रिया में बाधा आती है। इस वजह से पीरियड्स आने में देरी होती है।

2. कभी-कभी बुखार जैसी छोटी बीमारियों की वजह से पीरियड्स लेट आते हैं। लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां भी मासिक चक्र को प्रभावित करती हैं। हालांकि इनका प्रभाव अस्थायी होता है और जब आप बीमारियों से निजात पा लेती हैं तब आपका मासिक धर्म प्राकृतिक रूप से संचालित होने लगता है।

3. अपने दिन भर के शेड्यूल में बदलाव की वजह से भी अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है। नाइट शिफ्ट में काम करने, शादियां अटेंड करने या कहीं बाहर जाने की वजह से हुई देरी आपके बॉडी क्लॉक पर बुरा असर डालती है। ऐसे में मासिक चक्र का अनियमित होना संभावित है।

4. गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल या फिर अन्य दवाओं के इस्तेमाल से भी मासिक चक्र अनियमित हो जाता है। ऐसे में लाइटर या फिर स्किप्ड पीरियड की शिकायत हो सकती है। ऐसे होने पर आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

5. मोटापे की वजह से भी मासिक चक्र अनियमित हो जाता है। यह पीरियड्स में देरी और पीरियड्स न आने का भी कारण होता है। सामान्य से कम वजन होना भी पीरियड्स के देरी से या न आने का कारण हो सकता है।

6. जब महिलाओं उम्र 35-40 साल के आस-पास होती है तो उनमें कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में पीरियड्स आना भी बंद हो जाता है। यह प्रक्रिया अगर समय से पहले हो तो इसे ही प्री-मोच्योर मेनोपॉज कहा जाता है। ऐसे में महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

7. स्नपान कराने वाली महिलाओं में भी पीरियड्स की अनियमितता देखी गई है। ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जिनका मासिक चक्र तब तक सामान्य नहीं हुआ जब तक कि वजह स्तनपान कराती थीं।

8. खाना खाने में अनियमितता की वजह से भी जल्दी पीरियड्स की संभावना होती है। ऐसे में खाने का शेड्यूल बार-बार बदलने से परहेज करें।

9. शरीर का वजन कम होने की वजह से भी अनियमित माहवारी की समस्या हो सकती है। ऐसे में कई बार पीरियड्स पूरी तरह से बंद हो जाने की समस्या होने का भी खतरा होता है। सामान्य पीरियड्स के लिए हेल्दी वेट बहुत जरूरी है।

10. थॉयराइड की किसी भी तरह की समस्या होने पर भी आपकी माहवारी पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में अगर आपको किसी भी थॉयराइड समस्या संबंधी लक्षण दिखते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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