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प्रेग्नेंसी में बुखार से बच्चा हो सकता है दिल का मरीज, तालु और होंठ कटे होने का भी है खतरा

हाल ही में एक शोध में यह दावा किया गया है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में मां को बुखार हो जाने पर बच्चे को दिल संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

गर्भावस्था में मां को अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी सचेत रहना पड़ता है। इस दौरान खान-पान और आराम में लापरवाही से बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हाल ही में एक शोध में यह दावा किया गया है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में मां को बुखार हो जाने पर बच्चे को दिल संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, गर्भावस्था में बुखार से पीड़ित मां से होने वाले बच्चों के तालु तथा होंठ कटे होने का खतरा भी बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रेग्नेंसी के तीन से आठ माह तक की अवधि में मां को बुखार होने पर बच्चे के हृदय और जबड़े का विकास प्रभावित होता है।

वाशिंगटन के साइंस सिग्नलिंग नामक पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में यह दावा किया गया है। शोध से जुड़े वैज्ञानिक इस विषय पर रिसर्च करते हुए इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि किसी वायरस के संक्रमण की वजह से बच्चों में यह विकार आते हैं या फिर केवल बुखार की वजह से यह समस्या उत्पन्न होती है। शोधकर्ताओं को इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि प्रेग्नेंसी के पहले तीन से आठ माह के अंदर प्रेग्नेंट महिला को बुखार की वजह से उनके बच्चों में यह विकार दिखाई देते हैं।

जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में यह भी बताया गया है कि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में एसिटामिनोफेन के उचित इस्तेमाल से मां में बुखार की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे बच्चों में जन्मजात होने वाले शारीरिक विकार को काफी हद तक रोका जा सकता है। अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर एरिक बेन्नर ने इस बाबत बताया है कि जहां डॉक्टर गर्भावस्था में महिलाओं को किसी भी तरह की दवा से बचने की सलाह देते हैं, वहीं बुखार कम करने के लिए एसिटामिनोफेन के इस्तेमाल से लाभ हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को अपने डॉक्टर से हर खतरे और फायदे के बारे में चर्चा करनी चाहिए।

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