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प्रेग्नेंट महिला को भूलकर भी ना होने दें दुखी, पड़ता है ये असर

रिसर्च के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को कम किया जा सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

चिकित्सक हमेशा यह सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां को अपने स्वास्थ्य और खानपान को लेकर सजग रहना चाहिए। गर्भवती महिला के बेहतर स्वास्थ्य पर ही गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य भी निर्भर करता है। हाल ही में हुए एक रिसर्च से यह भी पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान मां का खुश रहना बेहद जरुरी है। इस रिसर्च में कहा गया हैकि अगर गर्भावस्था के दौरान मां दुखी रहती है तो इसका बुरा असर होने वाले बच्चे के मष्तिस्क पर पड़ता है। यह रिसर्च स्टैनफर्ड इंस्टीच्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के दो प्रोफेसरों ने किया है। रिसर्च में कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान मां का शरीर बेहद नाजुक होता है।

इस समय मां शारीरीरक और मानसिक तौर पर काफी संवेदनशील होती हैं। रिसर्च में कहा गया है कि अगर गर्भावस्था के दौरान महिला के किसी करीबी रिश्तेदार, मित्र या अन्य की मृत्यु हो जाती है तो गर्भवती मां काफी दुखी हो जाती हैं। मानसिक तौर पर दुखी होने की वजह से इस दुख का असर उनके होने वाले बच्चे पर पड़ता है। बच्चे पर पड़ने वाला यह असर उस वक्त नज़र आता है जब वो बड़े हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को मानसिक बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।

रिसर्च के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में मां के मन को चोट ना पहुंचे इसका विशेष ध्यान देना चाहिए।

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