क्या गर्भावस्था में साबुन के अधिक प्रयोग करने से हो सकता है गर्भपात? एक्सपर्ट्स से जानिए

साबुन और शैंपू जैसे ब्यूटी प्रोडक्ट, डिब्बाबंद खाना और दूसरे रासायनिक उत्पादों के संपर्क में लंबे समय तक रहने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

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आर्गेनिक साबुन त्वचा को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते (Photo-Pixabay)

गर्भावस्था में शरीर में बहुत तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जिनका ध्यान न दिया जाये तो बच्चे और मां दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। यहां तक कि बच्चे के विकास पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होता है।

गर्भावस्था में पेट बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है। स्किन ज्यादा फैलती है तो इससे खुजली की समस्या होती है। इससे छुटकारा पाने के लिए कई बार महिलाएं साबुन से पूरी शरीर को रगड़ कर नहाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साबुन और शैंपू जैसे व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद व कई अन्य दैनिक उत्पादों के लंबे समय तक संपर्क में रहना गर्भपात का कारण हो सकता है। आज हम इस लेख में महिला विशेषज्ञ से जानेंगे कि क्या गर्भवस्था के दौरान साबुन का प्रयोग हानिकारक हो सकता है।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रणाली अहाले ने जनसत्ता डॉट कॉम से बात करते हुए बताया कि गर्भावस्था के दौरान सामान्य साबुन का उपयोग गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। क्योंकि इसमें टीसीसी (ट्राइक्लोकार्बन) जैसे रसायन मिले हुए होते हैं। TCC के सम्पर्क में आने से अंग प्रणालियों की नाजुक प्रकृति और बच्चे के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

दरअसल ट्राइक्लोकार्बन मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के लिपिड मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचा सकता है। लिपिड प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अणु होते हैं जिनमें वसा, मोम, वसा में घुलनशील विटामिन, मोनोग्लिसराइड्स, डाइग्लिसराइड्स, ट्राइग्लिसराइड्स और अन्य शामिल होते हैं।

डॉक्टर प्रणाली के मुताबिक थैलेट (Phthalates) केमिकल से बने साबुन के इस्तेमाल से गर्भपात का भी खतरा बढ़ सकता है, इसके अलावा टीसीसी कैमिकल मां से बच्चों में ट्रांसफर होने से बच्चों बच्चों के शारीरिक डवलपमेंट को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को केमिकल उत्पादों को चुनने से पहले हमेशा उनके लेबल को ठीक से पढ़ना चाहिए। जिनमें टीसीसी होता है उन्हें खरीदने से बचना चाहिए।

इसके अलावा डॉ. आहाले ने बताया कि एंटीबैक्टीरियल या एंटीसेप्टिक साबुन के इस्तेमाल की जगह आर्गेनिक साबुन या फिर गर्म पानी का इस्तेमाल करें। साथ ही, जैतून और नारियल के तेल जैसे प्राकृतिक पदार्थों को मॉइस्चराइजर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि वैजाइनल वॉश लिक्विड का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

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