UP चुनाव से पहले ही कांग्रेस से अलग होना चाहते थे प्रशांत किशोर, दे दिया था इस्तीफा, आलाकमान ने नहीं मानी थी बात

रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में बताया था उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस आलाकमान को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन कई चीजों पर असहमति के बाद भी साथ काम करते रहे।

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रणनीतिकार प्रशांत किशोर (एक्सप्रेस फोटो)

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के साथ काम किया था। उनकी राहुल गांधी से कई दौर की बातचीत हुई थी। बकौल प्रशांत, उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर पहले ही उन्हें पूरा प्लान समझा दिया था। हालांकि इन चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई थी। बाद में प्रशांत किशोर ने कहा था कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी बात नहीं मानी।

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर के साथ एक इंटरव्यू में प्रशांत ने पूरा वाकया बयां किया था। उन्होंने बताया था कि किस तरह उन्होंने चुनाव पूर्व ही इस्तीफा सौंपा था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।

कांग्रेस नेताओं को भेज दिया था इस्तीफा: करण थापर ने प्रशांत से सवाल पूछा था, ‘चुनाव होने के बहुत समय बाद आपको लगा कि आप गलत रास्ते पर आ गए हैं?’ प्रशांत किशोर इसके जवाब में कहते हैं, ‘ऐसा नहीं है। मुझे याद है अक्टूबर 2016 में करीब दो या तीन बार मैंने अपना इस्तीफा दिया था और शायद इस्तीफा देने का मतलब ही ये होता है कि यूपी प्रोग्राम में मैं आपके साथ काम नहीं कर सकता।’ करण थापर कहते हैं, ‘तो क्या कांग्रेस ने आपके साथ काम करने के लिए जोर-जबरदस्ती की?’

प्रशांत किशोर कहते हैं, ‘मैं ऐसा नहीं कह सकता कि उन्होंने मेरे साथ जबरदस्ती की। जब आप कभी युद्ध की स्थिति में होते हैं तो थोड़ा ज्यादा आत्मविश्वास भी होता है। आप सोचते हैं कि हमें एक बार और कोशिश करनी चाहिए, तो ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी था। मुझे कांग्रेस के साथ काम करना का कोई मलाल तो नहीं है, लेकिन हां मैंने उससे बहुत कुछ सीखा। कांग्रेस के साथ काम करना मेरे जीवन का सबसे बेहतर अनुभव था।’

कांग्रेस ने 7 सीटों पर दर्ज की थी जीत: ‘द लल्लनटॉप’ के साथ एक बातचीत में भी प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश चुनाव पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि हमने कांग्रेस को जो प्लान सौंपा था, उसमें प्रिंयका गांधी की भी सक्रिय राजनीति में एंट्री शामिल थी। ऐसा नहीं हुआ, लेकिन सोनिया गांधी के वाराणसी से शुरू हुए रोड शो ने काफी काम भी किया था। कांग्रेस की जमीन पर हवा बनी ही थी कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके सब खत्म कर लिया।

गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस के हिस्से में 105 सीटें आई थीं। जबकि पार्टी को जीत सिर्फ 7 सीटों पर ही मिली थी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने 298 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

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