वीकेंड या छुट्टियों के मौके पर लोग अक्सर हिल स्टेशन या किसी समुद्र किनारे जाना पसंद करते हैं। हालांकि, कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर छुट्टियों के दौरान भीड़ अधिक रहती है। ऐसे में कई बार लोगों को ट्रैफिक जाम, महंगे होटल और खान-पीने की बढ़ी हुई कीमतों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, जिस सुकून और शांति की तलाश में लोग छुट्टियां बिताने निकलते हैं, वह भीड़भाड़ के कारण अक्सर नहीं मिल पाती। हालांकि, भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां अब तक पर्यटकों की पहुंच काफी कम है, इन्हीं में से एक पातालकोट घाटी है।
पातालकोट घाटी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, घने जंगलों और आदिवासी संस्कृति के लिए जानी जाती है। अगर आप किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां कम भीड़ के साथ शानदार प्राकृतिक नजारें हों तो पातालकोट घाटी को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस घाटी के बारे में:
कहां है पातालकोट
पातालकोट मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच में बसी एक सुंदर घाटी है, जिसके आसपास की खूबसूरती इसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक बनाती है। गहरी घाटी और चारों ओर ऊंची पहाड़ियों के कारण ऊपर से देखने पर इसका आकार घोड़े की नाल जैसा दिखाई देता है। यह छिंदवाड़ा से करीब 78 किलोमीटर और तामिया से लगभग 20-23 किलोमीटर दूर है। इस घाटी के बीच से दूधी नदी बहती है, जिसका नजारा कमाल का होता है।
क्यों खास है यह घाटी
पातालकोट घाटी की सबसे बड़ी खासियत यहां का प्राकृतिक वातावरण है, जो चारों ओर घने जंगल, ऊंची चट्टानी पहाड़ियों और घाटी के भीतर बसे छोटे-छोटे गांव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। यहां भारिया और गोंडा आदिवासी समुदाय के लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यहां की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और वनस्पति ही इसकी पहचान है। घाटी में कई गांव और छोटी बस्तियां हैं। यहां आप प्रकृति को करीब से देखने के साथ स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन को भी समझ सकते हैं।
कैसे पहुंचे पातालकोट
रेल मार्ग: पातालकोट का नजदीकी रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा जंक्शन है। छिंदवाड़ा तक ट्रेन से पहुंचने के बाद आगे सड़क मार्ग के जरिए पातालकोट पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग: पातालकोट पहुंचने के लिए छिंदवाड़ा से होते हुए तामिया पहुंचना पड़ता है और फिर वहां से आसानी से इस घाटी तक पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग: पातालकोट घाटी का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा नागपुर एयरपोर्ट है। नागपुर से सड़क या रेल मार्ग के जरिए छिंदवाड़ा और फिर वहां से पातालकोट पहुंचा जा सकता है।
घूमने का सही समय: वैसे तो किसी भी मौसम में पातालकोट जा सकते हैं लेकिन मानसून और उसके बाद घाटी हरियाली से भर उठती है। पहाड़ियों का नजारा काफी शानदार होता है।
कहां रुके: पातालकोट में ठहरने के विकल्प सीमित हैं। हालांकि, तामिया में ठहरने के लिए कई होटल उपलब्ध हैं। ऐसे में आप पातालकोट घूमने के लिए तामिया को बेस बना सकते हैं।
कैसे पड़ा नाम
पातालकोट के नाम को लेकर एक पौराणिक मान्यता प्रचलित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण के पुत्र मेघनाथ ने भगवान शिव की पूजा करने के बाद इसी स्थान से पाताल लोक में प्रवेश किया था। इसी वजह से लोग इसे पाताल लोक का प्रवेश द्वार भी मानते हैं। हालांकि, यह धार्मिक लोककथा है, इसका कोई प्रमाणित ऐतिहासिक आधार नहीं है। वहीं, घाटी की गहराई को भी इसके नाम से जोड़कर देखा जाता है। मध्य प्रदेश सरकार के छिंदवाड़ा जिला प्रशासन के अनुसार, यह घाटी आसपास के क्षेत्र से करीब 1,200 से 1,500 फीट नीचे स्थित है। इतनी गहरी घाटी होने के चलते इसे पातालकोट कहा गया।
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