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अपने बच्चों के साथ कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ऐसा बर्ताव, बदल लें आदत

बच्चों के साथ किसी तरह का बुरा रवैया न अपनाएं। अक्सर माता-पिता या बड़ों की आदत होती है बच्चों को छो-छोटी बात पर डांट देते हैं। बच्चों की छोटी सी गलती के लिए हाथ भी उठा देते हैं।

Author December 12, 2018 4:26 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर। ( फाइल फोटो)

बच्चे अपने माता पिता से ही सीखते हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने बच्चे के सामने कैसा एग्जामपल सेट कर रहे हैं। क्योंकि आपकी छोटी-बड़ी आदत और व्यवहार पर ही आपके बच्चों का भविष्य टीका होता है। इसलिए बच्चों के सामने ऐसी चीजें करने से बचें जो उनपर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। इसके बावजूद पैरेंट्स अनजाने या गुस्से में बच्चों के सामने ऐसी चीजें कर बैठते हैं जिनका उन पर गहरा असर पड़ता है। आइए आज हम आपको ऐसी बातों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें बदल लेना चाहिए ताकि बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

दूसरे से तुलना करना: आमतौर पर पैरेंट्स अपने बच्चों की तुलना किसी ओर से करते हैं। जैसे किसी दूसरे बच्चे से आपके बच्चे के मार्क्स कम आना या दूसरी कोई बात। ऐसा करने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। बच्चा खुद से आपने नफरत करने लग सकता है। यह बात बच्चों को काफी इफेक्ट करती है। इसलिए पैरेंट्स अपने बच्चों की तुलना नहीँ करनी चाहिए। इस बर्ताव को बदलने से बच्चों और आपको फायदा होगा।

जरूरत से ज्यादा सख्त होना: हर माता-पिता चाहता है कि उनका बच्चा हर चीज में अव्वल आए। उसे ऐसा बनाने के लिए कई बार पैरेंट्स अधिक सख्त होने लगते हैं। ऐसे में बच्चा अपने ही माता-पिता से डरने लगता है। पैरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि आपका बच्चा अभी इतना बड़ा नहीं है जो सही गलत का फैसला कर सके। बच्चों पर सख्ती दिखाने की बजाए प्यार से डील करें। इससे बच्चा आपकी बात अच्छे से समझ पाएगा।

आराम से बात करें: बच्चों के साथ किसी तरह का बुरा रवैया न अपनाएं। अक्सर माता-पिता या बड़ों की आदत होती है बच्चों को छो-छोटी बात पर डांट देते हैं। बच्चों की छोटी सी गलती के लिए हाथ भी उठा देते हैं। अपने इस रवैये से पैरेंट्स अपना गुस्सा तो निकाल लेते हैं लेकिन इससे बच्चे के अंदर गुस्सा भर देते हैं इसलिए जरूरी है कि बच्चे पर किसी तरह का बुरा रवैया न अपनाया जाए।

बच्चों की बात सुनें: कई बार पैरेंट्स अपने कामों में इतना उलझ जाते हैं कि बच्चों को दिया जाने वाला समय कम हो जाता है। जब बच्चों की बात को अनसुना किया जाता है तो वे नाराज हो जाते है इससे बच्चों में चिड़चिड़पन बढ़ता है। अपने बच्चे को गुस्से से बचाने के लिए उन्हें भरपूर समय दें और उनकी बात सुनें।

 

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