पनीर को शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसे हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा भी समझा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है पनीर को खाने का तरीका, उसके साथ खाए जाने वाले फूड्स और खाने का समय भी अहम भूमिका निभाते हैं। हाल ही में इंस्टाग्राम पर सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट आइना सिंघल ने एक पोस्ट शेयर कर लिखा, “पनीर समस्या नहीं है। असली बात यह है कि आप इसे किसके साथ और किस समय खाते हैं।”

आइना के मुताबिक, अगर पनीर को जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट, मीठी सॉस के साथ या देर रात खाया जाए, तो इससे ब्लोटिंग (पेट फूलना), भारीपन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। उनका कहना है कि शरीर पनीर को किस तरह पचाएगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी प्लेट में उसके साथ क्या-क्या है और आप उसे किस समय खा रहे हैं। अक्सर लोग इस बात पर ध्यान ही नहीं देते हैं।

किन फूड कॉम्बिनेशन से बचने की सलाह देती हैं एक्सपर्ट?

अगर आप भी प्रोटीन के लिए पनीर का सेवन करते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि पनीर को किस चीज से खाना चाहिए और किस चीज के साथ नहीं। आइना सिंघल का कहना है कि कुछ भारी फूड कॉम्बिनेशन पाचन को धीमा कर सकते हैं। उनके अनुसार, रोटी और चावल दोनों के साथ या दाल-राजमा के साथ पनीर खाने से पेट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि फल, मीठी सॉस या अतिरिक्त डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ पनीर खाने से कुछ लोगों में ब्लोटिंग और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

उनके मुताबिक, पनीन खाने के समय पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि देर रात पनीर खाया जाए या ऐसे दिन इसका सेवन किया जाए जब पहले से ही भारी भोजन किया गया हो, तो इससे पाचन और नींद दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

पनीर खाने का बेहतर तरीका क्या है?

आइना सिंघल पनीर को संतुलित तरीके से खाने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार, पनीर को पकी हुई सब्जियों, हल्के कार्बोहाइड्रेट और जीरा या अजवाइन जैसे पाचन में मदद करने वाले मसालों के साथ खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके साथ थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट भी शामिल किया जा सकता है।

क्या सच में पनीर के कुछ कॉम्बिनेशन पाचन बिगाड़ते हैं?

कंसल्टेंट डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने Indianexpress से बातचीत में कहा कि ‘फूड कॉम्बिनिंग’ थ्योरी, जिसमें प्रोटीन को कार्बोहाइड्रेट के साथ या डेयरी को फल के साथ खाने से मना किया जाता है, उसके समर्थन में कोई क्लिनिकल सबूत नहीं हैं।

उन्होंने बताया किशरीर का पाचन तंत्र अलग-अलग खाद्य पदार्थों को अलग-अलग समय पर नहीं पचाता है। पेट और पैंक्रियाज प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट को पचाने वाले एंजाइम एक साथ छोड़ते हैं, चाहे उन्हें किसी भी कॉम्बिनेशन में खाया गया हो।

फिर कुछ लोगों को परेशानी क्यों होती है?

कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि इसके पीछे एक शारीरिक कारण जरूर हो सकता है। पनीर में केसिन (Casein) नाम का प्रोटीन होता है, जो धीरे-धीरे पचता है। यदि इसे अधिक FODMAP वाली फलियों, जैसे राजमा या छोले, या बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के साथ खाया जाए, तो जिन लोगों की आंतों की गति धीमी होती है या जिन्हें IBS या SIBO जैसी समस्याएं होती हैं, उनमें ब्लोटिंग की शिकायत हो सकती है।

क्या इससे वजन भी बढ़ सकता है?

कनिका मल्होत्रा के अनुसार, वजन बढ़ना आमतौर पर भोजन की मात्रा और कुल कैलोरी पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ खाने के कॉम्बिनेशन पर।

उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश भारतीयों में किसी न किसी स्तर पर लैक्टोज मालडाइजेशन (Lactose Maldigestion) पाया जाता है। ऐसे में जिन लक्षणों को लोग ‘गलत फूड कॉम्बिनेशन’ का असर मानते हैं, वे कई बार बिना पहचान वाले लैक्टोज इनटॉलरेंस की वजह से भी हो सकते हैं।

पनीर खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

हमेशा ताजा, कम फैट वाला, बिना मिलावट वाला या घर का बना पनीर चुनें।
रोजाना लगभग 150–200 ग्राम पनीर प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
डीप फ्राई या ज्यादा क्रीम वाली ग्रेवी की बजाय पनीर को ग्रिल, स्टीम करके खाना बेहतर विकल्प है।
पनीर को फाइबर से भरपूर सब्जियों और सीमित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट के साथ खाएं।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जैसे मैदा, का अधिक सेवन करने से बचें।
पनीर खाने के साथ ही मीठी चीजें या डेजर्ट खाने से बचें।
हमेशा भरोसेमंद और अच्छी गुणवत्ता वाले स्रोत से ही पनीर खरीदें और मिलावट की जांच जरूर करें।

एक्सपर्ट के अनुसार, कई बार पाचन संबंधी परेशानी की वजह गलत फूड कॉम्बिनेशन नहीं बल्कि मिलावटी पनीर भी हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी और विशेषज्ञों की जानकारी पर आधारित है। कोई भी नया रूटीन शुरू करने से पहले हमेशा अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें।