फिरोज गांधी ने नेहरू सरकार के खिलाफ खोल दिया था मोर्चा, इस खुलासे के बाद वित्त मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा

फिरोज गांधी ने संसद में आजाद भारत के पहले वित्तीय घोटाले का खुलासा किया था। फिरोज के आरोप के बाद जांच में पंडित नेहरू के वित्त मंत्री की संलिप्तता के संकेत मिले थे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

Feroze Gandhi, Indira Gandhi
फिरोज गांधी के साथ इंदिरा गांधी (Photo- Indian Express)

इंदिरा गांधी ने साल 1942 में फिरोज गांधी से शादी की थी। हालांकि इंदिरा के पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे कि दोनों की शादी हो। उन्होंने इसके पीछे कई तर्क भी दिये थे, लेकिन बेटी की जिद को देखते हुए पीछे हट गए थे। हालांकि शादी के कुछ समय बाद ही फिरोज और नेहरू परिवार के बीच मतभेद भी सामने आने लगे थे। इंदिरा गांधी ससुराल छोड़कर इलाहाबाद आ गई थीं।

इंदिरा के लखनऊ छोड़कर इलाहाबाद लौटने के बाद फिरोज अकेले पड़ गए थे। तल्खियां बढ़ रही थीं। साल 1957 में दोनों के रिश्ते में तब और दरार आ गई जब फिरोज गांधी ने कांग्रेस की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। फिरोज ने संसद में अपने भाषण में नेहरू सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए देश के पहले वित्तीय घोटाले के खुलासे का दावा किया था। फिरोज गांधी ने आरोप लगाए थे कि कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा ने सरकारी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी के ज़रिए अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपए का निवेश कराया था।

‘बीबीसी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फिरोज का कहना था कि यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इन्वेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया था। जब तक एलआईसी को पता चला, उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। पंडित नेहरू उस समय देश के प्रधानमंत्री थे और वह नहीं चाहते थे कि फिरोज इस मामले को संसद में उठाएं क्योंकि इससे देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता था। दूसरी तरफ, सियासी गलियारों में चर्चा थी कि नेहरू अपने वित्त मंत्री टीटी कृष्णामाचारी को भी बचाना चाहते थे, लेकिन वह ऐसा करने में असफल रहे और कृष्णामाचारी को इस्तीफा देना पड़ा था।

लोकसभा में अपने भाषण में फिरोज गांधी ने कहा, ‘अध्यक्ष महोदय, आज सदन में मैं शार्प-शूटिंग और जोरदार धक्का मारने वाला हूं क्योंकि जब भी मैं हिट करता हूं तो जोर से हिट करता हूं और जोरदार हिट सहने करने की भी उम्मीद रखता हूं। मैं पूरी तरह से सचेत हूं कि दूसरा पक्ष भी टीएनटी (विस्फोटक पदार्थ) की भरपूर आपूर्ति से लैस है।’ इसके बाद उन्होंने अपने रिसर्च को तथ्यों के साथ पेश करना शुरू किया। साथ ही उन्होंने जांच की भी मांग की।

वित्त मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा: बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस एम.सी चगला के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। दो महीने बाद कमीशन ने अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी की संलिप्तता का संकेत दिया गया था, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। ये फिरोज गांधी और इंदिरा के रिश्ते पर भी आखिरी प्रहार था। इसके बाद इंदिरा अपने पिता के साथ सक्रिय राजनीति में आ गई थीं।

बता दें, साल 1952 में कांग्रेस के टिकट पर फिरोज गांधी ने राय बरेली से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई थी। इसके बाद वह साल 1957 में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर राय बरेली सीट से ही मैदान में उतरे और जीत का परचम बुलंद किया था।

इंदिरा गांधी बनी थीं कांग्रेस अध्यक्ष: बता दें पति फिरोज गांधी से रिश्तों में तल्खी के बीच इंदिरा गांधी का नाम कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर प्रस्तावित किया गया था और वो अध्यक्ष चुन ली गई थीं। पुपुल जयकर ने अपनी किताब में लिखा है, इसके बाद फिरोज गांधी ने खुद को अकेला पाया और घर तक सीमित हो गए थे। यहां तक कि वह प्रधानमंत्री के घर भी नहीं आते-जाते थे। करीब एक साल बाद 8 सितंबर 1960 में फिरोज गांधी का निधन हो गया था।

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