श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी अक्सर अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने मॉडर्न रिश्तों में बढ़ रहे छोटे-छोटे ‘रेड फ्लैग्स’ और माइक्रो-चीटिंग पर खुलकर बात की। अभिनेता इब्राहिम अली खान के साथ डेटिंग की खबरों को लेकर चर्चा में रहने वाली पलक तिवारी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान माइक्रो-चीटिंग के बढ़ते ट्रेंड पर अपनी राय रखी। ‘भूतनी’ एक्ट्रेस ने बताया कि रिश्ते में ऐसी कौन-सी बातें हैं जिन्हें वह स्वीकार नहीं करेंगी। एक स्वस्थ रिश्ते में यह तय होना जरूरी है कि कौन-सी बातें स्वीकार्य हैं और कौन-सी नहीं। यानी रिश्ते में स्पष्ट और स्वस्थ सीमाएं होना बेहद जरूरी है। पलक तिवारी ने कहा कि वह डेटिंग और रिलेशनशिप्स में इस्तेमाल होने वाले नए शब्दों और उनसे जुड़े रेड फ्लैग्स को अच्छी तरह समझती हैं।

पलक की नजरों में क्या है आइक्रो-चीटिंग

‘द साउथ दिल्ली गर्ल्स’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, अगर आप किसी और को बहुत आकर्षक मानते हैं या अपने टेक्स्ट मैसेज डिलीट करते हैं, भले ही उनमें कुछ गलत न हो, लेकिन आपको लगता है कि उन्हें छिपाने की जरूरत है, तो यह माइक्रो-चीटिंग हो सकती है। इसी तरह अगर मैं किसी रिश्ते में हूं और किसी दूसरे लड़के से मिलने जा रही हूं और उसके लिए खास तौर पर तैयार होती हूं, तो यह भी उसी का हिस्सा माना जा सकता है।

क्या होती है माइक्रो-चीटिंग

साधारण भाषा में समझें तो माइक्रो-चीटिंग उन व्यवहारों को कहा जाता है जिन्हें आमतौर पर धोखा नहीं माना जाता, लेकिन उनमें बेवफाई के शुरुआती संकेत मौजूद हो सकते हैं। इनमें ईमानदारी की कमी, बातें छिपाना या कमिटेड रिश्ते में रहते हुए किसी और के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाना शामिल हो सकता है ।पहली नजर में ये बातें मामूली लग सकती हैं, लेकिन समय के साथ ये रिश्ते और पार्टनर दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

रिलेशनशिप कोच एकता दीक्षित ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि माइक्रो-चीटिंग ऐसी चीज है जो देखने में सामान्य लगती है। लेकिन यहीं हरकतें कमिटेड रिश्ते की सीमाओं को कमजोर कर सकती हैं। इनमें ऐसे बिहेवियर भी शामिल होते हैं जो भले ही सीधे तौर पर शारीरिक या यौन बेवफाई न हों, लेकिन किसी तीसरे व्यक्ति के साथ भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव की ओर इशारा कर सकते हैं।

रिलेशनशिप कोच का कहना है कि यह बिहेवियर पूरी तरह से भावनात्मक या शारीरिक धोखे की लिस्ट में नहीं आते हैं, लेकिन फिर भी किसी रिश्ते में तय या अनकही सीमाओं, भरोसे और आपसी समझ को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

क्यों है यह चिंता का विषय?

माइक्रो-चीटिंग का एक बड़ा संकेत तब माना जाता है जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर की बजाय किसी दूसरे व्यक्ति की भावनाओं को ज्यादा समझने लगे या फिर उसका ज्यादा ध्यान रखने लगे। यही वजह है कि कई बार यह व्यवहार धीरे-धीरे आगे बढ़कर वास्तविक बेवफाई का रूप भी ले सकता है।

एकता दीक्षित बताती हैं कि माइक्रो-चीटिंग रिश्ते में भरोसे को कमजोर कर सकती है, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए चीटिंग की परिभाषा अलग हो सकती है। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी भावनात्मक ऊर्जा रिश्ते से बाहर किसी और पर खर्च करने लगता है, तो अपने पार्टनर के साथ नजदीकी और भावनात्मक जुड़ाव कम हो सकता है। ऐसा होने से उसके अंदर ठुकराए जाने जैसी भावना आने लगती है।

अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ माइक्रो-चीटिंग हो रही है, तो इसका असर उसके आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान पर भी पड़ सकता है। दीक्षित कहती हैं, ऐसी स्थिति में व्यक्ति खुद को कमतर महसूस कर सकता है। उसे धोखा खाने जैसा एहसास हो सकता है और वह खुद पर भी सवाल उठाने लग सकता है। कई बार लोग अपनी अहमियत और आकर्षण को लेकर भी असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, जिसका असर उनकी मेंटल हेल्थ पर पड़ सकता है।

अगर ऐसा लगे तो क्या करें?

एकता दीक्षित के अनुसार, अगर आपको महसूस हो कि आपका पार्टनर पहले से अलग बिहेवियर कर रहा है या माइक्रो-चीटिंग जैसी हरकतें कर रहा है, तो इस बारे में खुलकर बात करना जरूरी है। उन्हें बताएं कि उनके व्यवहार का आप पर क्या असर पड़ रहा है और रिश्ते में किन बातों को मंजूरी है या नहीं है, यह भी स्पष्ट करें। उनके मुताबिक इन कारणों को समझने से दोनों पार्टनर रिश्ते की असली समस्याओं तक पहुंच सकते हैं। उन्हें दूर करने के लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इससे रिश्ते में नई ऊर्जा, जुड़ाव और उत्साह वापस लाया जा सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी और उन विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है जिनसे बात की गई थी।