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तब नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने से किया था मना, अब राष्ट्रपति ने दिया राम मंदिर के लिए पहला चंदा

केएम मुंशी ने 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। उस वक्त जवाहर लाल नेहरू ने डाॅ राजेंद्र प्रसाद को खत लिखकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए कहा था।

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मकर सक्रांति के शुभ अवसर से पिछले एक महीने से रुके मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं। इसी के साथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित होना भी शुरू गया है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई बड़े नेताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है। राष्ट्रपति कोविंद ने राम मंदिर निर्माण के लिए 5,01,000 रुपए का चंदा दिया है। राष्ट्रपति के चंदा देने के साथ ही राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगने का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।

विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने बताया,’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राम मंदिर के लिए पहला चंदा दिया।’ आलोक कुमार ने कहा, ‘वो देश के प्रथम नागरिक हैं। इसलिए हम चाहते थे कि वो इस अभियान की शुरुआत करें। उन्होंने 5 लाख एक हजार रुपए का चंदा दिया है।’ राष्ट्रपति के चंदा देने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करना शुरू कर दिया है।

नेहरू ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने से किया था मना : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राम मंदिर के लिए चंदा देने के बाद सोशल मीडिया पर लोग सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन से जुड़े उस किस्से का भी जिक्र कर रहे हैं, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तब राष्ट्रपति रहे राजेंद्र प्रसाद को मंदिर के उद्घाटन में जाने से मना कर दिया था।

केएम मुंशी ने 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। उस वक्त जवाहर लाल नेहरू ने डाॅ राजेंद्र प्रसाद को खत लिखकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए कहा था। नेहरू ने खत में लिखा था,’ भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है,राष्ट्रपति के किसी मंदिर के कार्यक्रम में जाने से गलत संदेश जाएगा और इसके कई निहितार्थ लगाए जा सकते हैं।’

डॉ राजेंद्र प्रसाद ने नहीं मानी थी राय : तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उस‌ समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की राय नहीं मानी थी। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री  नेहरू ने खुद को सोमनाथ मंदिर के कार्यक्रम से अलग रखा था ।

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