नीतीश कुमार के पास अचानक इस्तीफा लेकर पहुंच गए थे प्रशांत किशोर, इस बात को लेकर थी असहमति

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार से अलग होने का फैसला कर लिया था। नीतीश कुमार ने सीएए-एनआरसी कानून का समर्थन किया था। इससे प्रशांत काफी निराश हो गए थे। जानिए क्या हुई थी दोनों के बीच बातचीत-

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (फोटो- फेसबुक- @Prashantkishorr)

प्रशांत किशोर ने साल 2014 में बीजेपी के लिए रणनीति बनाई थी। इन चुनावों में बीजेपी को ऐतिहासिक बहुमत मिला था, लेकिन इसके बाद प्रशांत ने नरेंद्र मोदी से अपनी राहें अलग कर ली थी। साल 2015 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर ने जेडीयू की मदद की थी। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रशांत किशोर को पार्टी में बड़ा पद भी दिया था। प्रशांत कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर अपनी राय देते हैं।

प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक चीज़ को लेकर उनके पार्टी से मतभेद थे और वह अपनी इस्तीफा लेकर नीतीश कुमार के पास पहुंच गए थे। प्रशांत किशोर ने ‘Mojo Story’ से बात करते हुए कहा था, ‘हमारा मकसद सिर्फ बिहार चुनाव जीतना नहीं था। हमने कुछ वायदे भी किए थे। आमतौर पर नीतीश कुमार विवादित मुद्दों पर राय नहीं देते हैं। मैंने जेडीयू बदलाव की उम्मीद के साथ जॉइन की थी। CAA और NRC पर मेरी राय थोड़ी अलग थी।’

नीतीश कुमार से की थी मुलाकात: बरखा दत्त उन्हें बीच में रोकती हैं और कहती हैं, ‘जब आपने नीतीश कुमार से मुलाकात की तो अपना इस्तीफा ऑफर किया?’ प्रशांत किशोर कहते हैं, ‘अब मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे क्या बात की। इसका पब्लिक में करने का कोई महत्व नहीं है। मैंने नीतीश जी से ये समझने का प्रयास किया कि पार्टी ने इसका क्यों समर्थन किया? मैं सिर्फ इतना ही चाहता था कि बिहार में एनआरसी नहीं होना चाहिए। नीतीश कुमार ने मुझे सुनिश्चित किया कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा।’

CAA-NRC पर क्या बोले प्रशांत किशोर: प्रशांत किशोर ने कहा था, ‘अगर बिहार में एनआरसी लागू होता है तो आगे देखेंगे कि क्या हो सकता है। फिलहाल मेरे साथ ऐसा नहीं है। मेरे लिए सिर्फ राजनीति ही सबकुछ नहीं है। मैं हर हाल में नीतीश कुमार के साथ हूं। अगर सीएम ये कहते हैं कि सीएए और एनआरसी लागू नहीं होगा तो इसका काफी ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। पार्टी के लिए भी ये अच्छा ही है। एनआरसी लागू करना वैध नहीं है। जब ये ग्राउंड पर काम करना शुरू करेगा तो सरकार के कामकाज पर जरूर सवाल तो उठेंगे।’

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