भारत में सड़क किनारे मिलने वाले वड़ा पाव, समोसा, पकौड़े और अन्य स्नैक्स अक्सर अखबार में लपेटकर परोसे जाते हैं। हालांकि यह तरीका वर्षों से प्रचलन में है, लेकिन अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बार फिर इसके खिलाफ चेतावनी जारी की है। FSSAI का कहना है कि अखबार में खाना पैक करना या परोसना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
हाल ही में मुंबई के एक लोकप्रिय वड़ा पाव विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई के बाद FSSAI ने सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों, रेस्तरां, स्ट्रीट वेंडर्स और क्लाउड किचन को केवल फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
अखबार और भोजन का मेल क्यों है खतरनाक?
आकाश हेल्थकेयर की माइक्रोबायोलॉजी एक्सपर्ट और हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल ऑफिसर डॉ. दिशा भाटिया के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही से होता है। वे बताती हैं कि अखबार की स्याही में सॉल्वेंट्स, पिगमेंट्स, बाइंडर्स और अन्य रासायनिक पदार्थों का मिश्रण होता है।
इनमें सीसा (लेड), क्रोमियम और कैडमियम जैसे भारी धातु तत्व मौजूद हो सकते हैं। इसके अलावा, स्याही में फ्थैलेट्स, मिनरल ऑयल और सिंथेटिक रंग भी पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
गर्म और तैलीय भोजन से बढ़ जाता है खतरा
जब समोसा, वड़ा पाव, पकौड़े या अन्य गर्म और ऑयली फूड्स अखबार के संपर्क में आते हैं, तो जोखिम और बढ़ जाता है। डॉ. भाटिया के अनुसार, गर्मी और तेल रसायनों को घुलने में मदद करते हैं, जिससे अखबार की स्याही में मौजूद हानिकारक तत्व भोजन में स्थानांतरित हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ‘केमिकल माइग्रेशन’ कहा जाता है। इसके बाद ये रसायन भोजन के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
लंबे समय में हो सकते हैं गंभीर स्वास्थ्य नुकसान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारी धातुओं के लगातार सेवन से शरीर में टॉक्सिसिटी बढ़ सकती है। इससे नर्वस सिस्टम, किडनी और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। बच्चों में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है, क्योंकि सीसा जैसे तत्व उनके मानसिक विकास और सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
इसके अलावा, स्याही में मौजूद कुछ रसायनों को कैंसरकारी और हार्मोनल असंतुलन पैदा करने वाला माना जाता है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से मेटाबॉलिक विकार और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
अखबार में छिपे हो सकते हैं खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस
खतरा केवल रसायनों तक सीमित नहीं है। अखबार कई लोगों के हाथों से होकर गुजरता है। प्रिंटिंग प्रेस से लेकर डिलीवरी एजेंट और फिर दुकानदार तक पहुंचने के दौरान यह धूल, गंदगी और विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आता है।
डॉ. भाटिया के अनुसार, अखबार की सतह पर ई. कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। वहीं नोरोवायरस और हेपेटाइटिस-ए जैसे वायरस भी कुछ समय तक कागज की सतह पर जीवित रह सकते हैं। ये सूक्ष्मजीव भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर फूड पॉइजनिंग और अन्य संक्रमणों का कारण बन सकते हैं।
भोजन पैक करने के लिए क्या हैं सुरक्षित विकल्प?
एक्सपर्ट्स अखबार की जगह निम्नलिखित सुरक्षित विकल्पों के उपयोग की सलाह देते हैं:
- फूड-ग्रेड बटर पेपर, जो तेलरोधी और रासायनिक रूप से सुरक्षित होता है।
- केले के पत्ते और साल के पत्तों से बनी प्लेटें, जो पारंपरिक होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
- गन्ने के रेशों से बने कंटेनर, जो मजबूत और कम्पोस्टेबल होते हैं।
- फूड-कॉन्टैक्ट के लिए प्रमाणित पेपर और कार्डबोर्ड कंटेनर।
रीसाइकिल्ड पेपर भी हो सकता है नुकसानदायक
डॉ. भाटिया चेतावनी देती हैं कि सभी प्रकार के कागज सुरक्षित नहीं होते। रीसाइकिल्ड पेपर में पुराने प्रिंटिंग इंक और रासायनिक अवशेष मौजूद हो सकते हैं, जो सामान्य अखबार से भी अधिक हानिकारक साबित हो सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।)
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