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Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Quotes: भेष बदलकर अंग्रेजों की गिरफ्त से भागे थे नेताजी, तैयार की थी ‘आजाद हिंद फौज’ नाम की अलग सेना

Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan, Quotes in Hindi: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कट्टर सोच का ही नतीजा था कि अंग्रेजों ने उन्हें 1921 से 1941 के बीच 11 बार जेल भेजा था...

Subhash Chandra Bose Speech: 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है।

Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan, Quotes in Hindi: देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में जितना योगदान महात्मा गांधी का माना जाता है, ऐसे ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का भी रहा है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था और इस साल देश उनकी 123वीं जयंती मनाने जा रहा है। नेताजी ने 1919 में भारत छोड़ आंदोलन में हिस्सा लिया।

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उस दौर में भी भारतीय सिविल सेवा में चयन होने के बावजूद उन्होंने 1921 में इस्तीफा दे दिया और कैंब्रिज से भारत लौट आए। उन्होंने देश की आजादी के लिए जवाहर लाल नेहरू के साथ मिलकर आंदोलन और अन्य काम किए। उनकी मृत्यु को लेकर कई विवाद हैं, हालांकि ये माना जाता है कि 18 अगस्त, 1945 को उनकी मृत्यु हो गई।

उनके कुछ प्रसिद्ध कथन या कोट्स थे जिन्हें आज भी याद किया जाता है:

1.”मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में हम में से कौन -कौन  जीवित बचेंगे, परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजय हमारी ही होगी।”

2.”आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके; एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।”

3.”राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और सुन्दर से  प्रेरित  है।”

4.”ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।”

5.”जीवन में प्रगति का आशय यह है कि शंका संदेह उठते रहें और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।”

आइए देश की आजादी में उनके अहम योगदान को उनकी जयंती पर भाषण के जरिए दूसरों को बताएं…

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Highlights

    11:54 (IST)23 Jan 2020
    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के अनमोल विचार...

    “एक सच्चे सैनिक को सैन्य प्रशिक्षण और आध्यात्मिक प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है।”

    11:20 (IST)23 Jan 2020
    सुभाष चंद्र बोस के विचार...

    “यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का भुगतान अपने रक्त से करें। आपके बलिदान और परिश्रम के माध्यम से हम जो स्वतंत्रता जीतेंगे, हम अपनी शक्ति के साथ संरक्षित करने में सक्षम होंगे।”

    10:47 (IST)23 Jan 2020
    सुभाष चंद्र बोस के प्रेरणदायक विचार...

    “माँ का प्यार स्वार्थ रहित और सबसे गहरा होता है ! इसको किसी भी प्रकार नापा  नहीं जा सकता।”

    10:12 (IST)23 Jan 2020
    नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रेरणादायक विचार...

    “आज हमारे पास एक इच्छा होनी चाहिए ‘मरने की इच्छा’,  क्योंकि मेरा देश जी सके – एक शहीद की मौत का सामना करने की शक्ति, क्योंकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीद के खून से प्रशस्त हो सके।”

    09:31 (IST)23 Jan 2020
    सुभाष चंद्र बोस की ऐसे हुई हिटलर से मुलाकात...

    1941 में उन्हें एक घर में नजरबंद करके रखा गया था, जहां से वे भाग निकले। नेताजी कार से कोलकाता से गोमो के लिए निकल पड़े। वहां से वे ट्रेन से पेशावर के लिए चल पड़े। यहां से वह काबुल पहुंचे और फिर काबुल से जर्मनी रवाना हुए जहां उनकी मुलाकात अडॉल्फ हिटलर से हुई।

    09:15 (IST)23 Jan 2020
    'हम मरेंगे तो भारत जिएगा.. ' कुछ ऐसे थे नेताजी

    नेता जी का देश के प्रति समर्पण उनकी इस कहावत से छलकता है-  ”आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके; एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।”

    08:58 (IST)23 Jan 2020
    'अंत में विजय हमारी ही होगी'

    नेता जी का अपना ही रुतबा था, वहीं अंग्रेजी सेना की गिरफ्त से नेता जी उस वक्त भाग गए थे जब उन्हें एक घर में नजरबंद कर कैद कर रखा था। नेता जी को उनकी कही इस बात के लिए याद किया जाता है। ”मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में हम में से कौन -कौन जीवित बचेंगे, परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजय हमारी ही होगी।”

    08:54 (IST)23 Jan 2020
    ताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज गठित की थी..

    19 मार्च 1944 के दिन था जब हिंद फौज के सैनिकाों ने पहली बार झंड़ा फहराया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज गठित की थी। राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले लोगों में कर्नल शौकत मलिक, कुछ मणिपुरी और आजाद हिंद के लोग शामिल थे।

    08:33 (IST)23 Jan 2020
    Fact about Subhash: नहीं कर पाए सिविल सर्विस और छोड़ दी अंग्रेजों की नौकरी

    पिता की इच्छा पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में सिविल सर्विस परीक्षा इंग्लैंड में जाकर पास की। कुछ ही दिन नौकरी करने के बाद उनका मन अंग्रेजों की गुलामी से उक्ता गया और 23 अप्रैल 1921 को इस्तीफा भी दे​ दिया। इसके बाद वह स्वाधीनता संग्राम में शामिल हो गए।

    08:11 (IST)23 Jan 2020
    Lesser Known Fact about Netaji: हिटलर से भी मिलने पहुंच गए थे सुभाष

    अंग्रेजों ने सुभाष चंद्र बोस को 1941 में एक घर में नजरबंद कर कैद कर रखा था। तब उन्होंने महानिष्क्रमण यात्रा नाम के अभियान के तहत भेष बदलकर भागने की योजना बनाई और सफल हुए। इसके तहत वह सबसे पहले कार के माध्यम से कोलकाता से गोमो गए। वहां ट्रेन से पेशावर रवाना हो गए। फिर पेशावर से काबुल होते हुए नेताजी जर्मनी गए जहां उन्होंने अडॉल्फ हिटलर से मुलाकात की।

    07:56 (IST)23 Jan 2020
    भेष बदलकर अंग्रेजों की गिरफ्त से भागे थे नेताजी

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े तमाम दस्तावेजों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि जिन दिनों में अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया था, तब नेताजी ने भेष बदल कर भागने की योजना तैयार की थी। इस पूरी रणनीति का नाम दिया गया महानिष्क्रमण यात्रा। इसकी योजना बनाई थी उनके मित्र सत्यव्रत बनर्जी ने।

    07:25 (IST)23 Jan 2020
    गांधी के कई विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते थे नेताजी

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस कई मामलों में महात्मा गांधी की बातों और विचारों से इत्तेफाक नहीं रखते थे। वह मानते थे कि हिंसक प्रयास के बिना भारत को आजादी नहीं मिलेगी। अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए मजबूत क्रांति की जरूरत है।

    07:07 (IST)23 Jan 2020
    आज भी लोग नेताजी की बहादुरी के किस्से बहुत चाव से सुनते हैं

    ऐसा माना जाता है कि 1945 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु एक प्लेन दुर्घटना में हुई थी। इससे देश की आजादी की उम्मीद लगाए लोगों को बहुत बड़ा सदमा लगा था। पर आज भी लोग नेताजी की बहादुरी के किस्से बहुत चाव से सुनते हैं। उनकी वीरता के बारे में लोग कई बातें करते हैं। खासकर युवाओं के लिए नेताजी बहुत बड़े प्रेरणास्रोत हैं। हर भारतीय बच्चे को उनको और भारत की स्वतंत्रता के लिये किये गये उनके कार्यों के बारे में जरुर जानना चाहिये।

    06:58 (IST)23 Jan 2020
    जापान, बर्मा और मलाया से लोग आए आजाद हिंद फौज में

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जिस आजाद हिंद फौज का गठन किया था, पहले इस फौज में वे लोग आए जो जापान की ओर से बंदी बनाए गए थे। फिर धीरे धीरे बर्मा और मलाया में स्थित भारतीय स्वयंसेवक भी शामिल हुए।

    06:42 (IST)23 Jan 2020
    आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने फहराया था तिरंगा

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने पहली बार 19 मार्च 1944 के दिन झंडा फहराया था। राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले लोगों में कर्नल शौकत मलिक, कुछ मणिपुरी और आजाद हिंद के लोग शामिल थे।

    06:22 (IST)23 Jan 2020
    85000 सैनिकों से तैयार की थी आजाद हिंद फौज

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए एक अलग सेना ही तैयार कर ली थी। उसका नाम था आजाद हिंद फौज। बताया जाता है कि इस फौज का गठन करने में जापान ने उस दौर में काफी मदद की थी। एक अनुमान के मुताबिक, आजाद हिंद फौज में करीब 85000 सैनिक थे​ जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों थे।

    23:32 (IST)22 Jan 2020
    स्वतंत्रता का मोल खून से चुकाने को कहा था नेताजी ने

    ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।

    23:01 (IST)22 Jan 2020
    यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो...

    हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो, हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो, फिर भी हमें आगे बढ़ना ही है। सफलता का दिन दूर हो सकता है, पर उसका आना अनिवार्य है।

    22:25 (IST)22 Jan 2020
    मां को बेहद प्यार करते थे नेताजी

    माँ का प्यार स्वार्थ रहित और सबसे गहरा होता है। इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता।

    22:01 (IST)22 Jan 2020
    महात्मां गांधी से मुलाकात के बाद ही नेता जी आजादी की मुहिम से जुडे़

    साल 1921 में बोस महात्मा गांधी से मिले उसके उपरांत ही उन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने का फैसला किया। देशसेवा के साथ ही सुभाष सामाजिक कार्यों में भी आगे रहते थे। 1922 में कोलकाता में आई भयानक बाढ़ से पीड़ित लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने से लेकर उनके खाने- पीने की व्यवस्था तक, सब में नेताजी ने मदद की थी। इसके अलावा उन्होंने युवाओं के एक समूह का भी गठन किया था जिसका उद्देश्य समाज की सेवा करना था।

    21:12 (IST)22 Jan 2020
    सुभाष चंद्र बोस का गांधी जी से विचारों में हमेशा रहा मतभेद लेकिन मकसद था एक

    नेताजी ने अपनी खुद की भारतीय राष्ट्रीय शक्तिशाली पार्टी 'आजाद हिन्द फौज' का गठन गांधी जी से मनमुटाव होने के बाद किया। कहा जाता है कि कांग्रेस ज्वॉइन करने के बाद उनका और गांधी जी वैचैरिक मतभेद हमेशा बना रहा। लेकिन दोनों का मकसद सिर्फ एक था, भारत को आजाद करवाना।  बोस को कई बार जेल जाना पड़ा लेकिन इससे न तो वो निराश हुए और न ही हताश। वो कुछ समय के लिए जर्मनी भी गए और वहां रहने वाले भारतीयों और कुछ भारतीय युद्धबंदियों की मदद से भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया। हिटलर से निराश होने के बाद वो जापान गए और अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना को दिल्ली चलो का एक प्रसिद्ध नारा दिया।

    20:24 (IST)22 Jan 2020
    अंग्रेजों के आधीन काम करने के सख्त खिलाफ थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस

    कुशाग्र बुद्धि के धनी सुभाष चंद्र बोस ने पिता की मर्जी के अनुसार आईसीएस की परीक्षा दी और उसमें सफलता प्राप्त की। हालांकि, अंग्रेजों के अधीन काम करना उन्हें कतई मंजूर नहीं था जिस वजह से सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दे दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- 'जब तुमने देशसेवा का प्रण ले ही लिया है, तो कभी इस रास्ते से कदम पीछे मत हटाना।'

    19:27 (IST)22 Jan 2020
    हवाई दुर्घटना में हुई सुभाष चंद्र बोस की मौत आज भी एक रहस्य है।

    23 जनवरी 1897 में जन्में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का निधन 18 अगस्त 1945 को टोक्यो (जापान) जाते वक्त ताइवान के पास एक हवाई दुर्घटना में हुआ था ऐसा बताया जाता है। लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया, जिसके कारण आज भी उनकी मौत पर विवाद बना हुआ है और ये एक रहस्य बनी हुई हैं।

    18:59 (IST)22 Jan 2020
    आजाद हिंद फौज का पुनर्गठन कर नेती जी सुभाष चन्द्र बोस ने दिया ये प्रसिद्ध नारा

    नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने मोहन सिंह द्वारा गठित की गई आजाद हिंद फौज की कमान अपने हाथों में ले ली और उसका पुनर्गठन किया। नेता जी के इस संगठन के  प्रारंभ में झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। इसके अलावा 4 जुलाई 1944 को नेता जी अपनी फौज के साथ बर्मा पहुंच गए और वहीं उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा दिया। ''तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा''

    18:22 (IST)22 Jan 2020
    मेहनत और लगन से अंग्रेजी शासन काल में भी की अच्छी शिक्षा ग्रहण

    नेता जी सुभाष चंद्र बोस की प्रारंभिक पढ़ाई कटक में हुई थी। उसके बाद उन्होंने कोलकाता के प्रेजिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिये उनके माता पिता ने उन्हें इंग्लैंड भेज दिया था। उस वक्त जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था उस वक्त किसी भी भारतीया का सिविल सर्विसेस के लिये जाना बहुत कठिन था। लेकिन फिर भी नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने सिविल सर्विसेस में चौथा स्थान प्राप्त किया।

    17:33 (IST)22 Jan 2020
    नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने सन् 1937 में की थी शादी

    देश के युवाओं में कम ही लोग इस बारे में जानते होंगे कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने सन् 1937 में अपनी सेक्रेटरी और आस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की थी। उन दोनों की एक अनीता नाम की बेटी भी है। जो जर्मनी में सपरिवार रह कर अपना जीवन यापन करती है।

    16:43 (IST)22 Jan 2020
    आजाद हिंद फौज के गठन के बाद आजादी को मिली थी नई दिशा

    5 जुलाई 1943 को 'आजाद हिन्द फौज' का विधिवत गठन हुआ। 21 अक्टूबर 1943 को एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीयों का सम्मेलन कर उसमें अस्थायी स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया।

    15:55 (IST)22 Jan 2020
    नेताजी के पिता ने भी दिया उनका साथ

    सुभाष चंद्र बोस ने जब अंग्रेजों की नौकरी को ठुकराकर देश सेवा का प्रण लिया तो उस समय उनके पिता ने भी उनके फैसले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि- 'जब तुमने देशसेवा का प्रण ले ही लिया है, तो कभी अपने कदमों को डगमगाने मत देना।'

    13:54 (IST)22 Jan 2020
    आईएएस परीक्षा पास की फिर भी नहीं की अंग्रेजों की नौकरी

    सुभाष के पिता का नाम जानकीनाथ और माता का प्रभावतीदेवी था। इनके पिता कटक के मशहूर वकीलों में से एक थे। पिताजी की इच्छा थी कि सुभाष बड़े होकर आईएएस बनें। उनकी इच्छा को देखते हुए उन्होंने इस परीक्षा में सफलता भी हासिल कर ली लेकिन बचपन से ही अंग्रेजों से बैर रखने वाले सुभाष को उनके अंदर काम करना मंजूर नहीं था। इसलिए इस्तीफा देकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बनना उचित समझा।

    13:09 (IST)22 Jan 2020
    आज भी युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं नेताजी

    नेताजी सुभाषचंद्र बोस का दिया हुआ नारा, 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' विश्व प्रसिद्ध है। आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बोस की बातें आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। अपने जोशीले नारों से देशवासियों में उत्साह भरने वाले जननायक सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक शहर में हुआ था।

    12:18 (IST)22 Jan 2020
    नेताजी की मौत आज भी है एक रहस्य

    मान्यता है कि 16 अगस्त 1945 को एक हवाई यात्रा पर निकले नेताजी का विमान ताइहोकु हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आजाद भारत का स्वप्न देखने वाले नेताजी कभी न उठने वाली नींद के आगोश में समा गए। हालांकि उनकी मौत को लेकर इस तथ्य की किसी भी तरह से अब तक पुष्टि नहीं हुई है। पूरी दुनिया में उनकी मौत आज भी एक रहस्य है।

    11:55 (IST)22 Jan 2020
    नेताजी ने कब दिया ये नारा— 'आप मुझे खून दो, मैं आपको आजादी दूंगा'

    नेताजी एक ओजस्वी वक्ता थे। अपने हर भाषण में वो देशप्रेम और देश के नौजवानों को अवश्य शामिल करते थे। 12 सितंबर 1944 को रंगून के जुबली हॉल में शहीद यतीन्द्र दास के स्मृति दिवस पर नेताजी ने अत्यंत मार्मिक भाषण देते हुए कहा- 'अब हमारी आजादी निश्चित है, परंतु आजादी बलिदान मांगती है। आप मुझे खून दो, मैं आपको आजादी दूंगा।' यही देश के नौजवानों में प्राण फूंकने वाला वाक्य था, जो भारत ही नहीं दुनिया के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया।

    11:43 (IST)22 Jan 2020
    महात्मा गांधी से मिलने के बाद ही सुभाष आजादी के मुहिम से जुड़े

    साल 1921 में बोस महात्मा गांधी से मिले उसके उपरांत ही उन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने का फैसला किया। देशसेवा के साथ ही सुभाष सामाजिक कार्यों में भी आगे रहते थे। 1922 में कोलकाता में आई भयानक बाढ़ से पीड़ित लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने से लेकर उनके खाने- पीने की व्यवस्था तक, सब में नेताजी ने मदद की थी। इसके अलावा उन्होंने युवाओं के एक समूह का भी गठन किया था जिसका उद्देश्य समाज की सेवा करना था।

    11:40 (IST)22 Jan 2020
    अंग्रेजों के अधीन काम नहीं करना चाहते थे सुभाष

    कुशाग्र बुद्धि के धनी सुभाष चंद्र बोस ने पिता की मर्जी के अनुसार आईसीएस की परीक्षा दी और उसमें सफलता प्राप्त की। हालांकि, अंग्रेजों के अधीन काम करना उन्हें कतई मंजूर नहीं था जिस वजह से सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दे दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- 'जब तुमने देशसेवा का प्रण ले ही लिया है, तो कभी इस रास्ते से कदम पीछे मत हटाना।'

    11:39 (IST)22 Jan 2020
    Netaji Subhash chandra bosh Jayanti: ऐसे तैयार करें नेताजी पर स्पीच

    नमस्कार,

    आज जिस आजाद फिजा में हम सांस ले रहे हैं उसके पीछे कई सेनानियों ने अपने रक्त बहाए हैं। न जान कितने दिन और महीने जेल में गुजारने के बाद उन लोगों ने यह आजादी हासिल की। इन्हीं शूरवीरों में एक नाम सुभाषचंद्र बोस का भी था। 23 जनवरी 1897 का दिन भारतीय इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिन उड़ीसा के कटक शहर में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सुभाषचंद्र बोस का जन्म के प्रसिद्ध हुआ था। वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के पुत्र सुभाष बचपन से ही देशप्रेम की भावना से भरे थे।

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