Subhash Chandra Bose Jayanti 2020: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बापू को क्यों कहा था राष्ट्रपिता? पढ़िए उनकी जयंती पर खास रिपोर्ट

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2020: स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले सुभाष चंद्र बोस को प्यार से लोग नेताजी कहकर बुलाते थें। देशप्रेम से भरे नेताजी की जयंती हर साल 23 जनवरी को मनाई जाती है। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ ऐसी बातों को जिनसे हैं आप अनजान

subhash chandra bose jayanti, netaji subhash chandra bose jayanti, netaji subhash chandra bose jayanti speech, netaji subhash chandra bose jayanti 2020, subhash chandra bose jayanti 2020, subhash chandra bose jayanti quotes, subhash chandra bose jayanti essay, subhash chandra bose jayanti bhashan, subhash chandra bose jayanti biography, subhash chandra bose jayanti information, subhash chandra bose jayanti information, subhash chandra bose jayanti factsSubhash Chandra Bose Jayanti 2020: साल 1921 में बोस महात्मा गांधी से मिले और नेताजी ने ही सबसे पहले गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर पुकारा था।

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2020: आजाद हिंद फौज के नायक सुभाष चंद्र बोस यूं तो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पर नेताजी की जयंती के अवसर पर हम आपको बताएंगे उनसे जुड़ी खास बातें। “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के नारे से देशवासियों में जोश और ऊर्जा भर देने वाले बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा राज्य के कटक शहर में हुआ था। वकील पिता जानकीनाथ बोस और मां प्रभावती के बेटे सुभाष चंद्र बोस कुशाग्र बुद्धि के धनवान थे। साल 1921 में बोस महात्मा गांधी से मिले और नेताजी ने ही सबसे पहले गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर पुकारा था।

Read | Happy Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Quotes, Wishes Images, Status, Messages, Speech

पिता चाहते थे आईएएस बनाना- सुभाष बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे। कटक से ही प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई कलकत्ता यूनिवर्सिटी से की। पूरे विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान हासिल करने वाले बोस को उनके पिता आईसएएस बनाना चाहते थें पर उनका मन तो देशभक्ति में रमा हुआ था जिस वजह से उन्हें अंग्रेजों का गुलाम बनकर काम करना कतई मंजूर नहीं था।

गांधी जी से थें प्रभावित- सुभाष चंद्र बोस की गांधी जी से पहली मुलाकात 1921 में हुई। इसके बाद ही वो आजादी की लड़ाई का हिस्सा बने। उनमें मौजूद देशप्रेम को देखते हुए गांधी जी ने उन्हें देशभक्तों का देशभक्त होने का दर्जा दिया था। हालांकि, भगत सिंह की फांसी के बाद उन दोनों में कुछ दूरियां आ गईं।

सामाजिक कार्यों से भी था लगाव- आजादी की लड़ाई के साथ ही उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों से भी था। 1922 में बंगाल में आई भयंकर बाढ़ से घिरे लोगों की उन्होंने हरसंभव मदद की थी। साथ ही उन्होंने ‘युवक-दल’ की स्थापना की ताकि समाज में सेवा का काम नियमित रूप से चलता रहे।

आजाद हिन्द फौज- आजाद हिंद फौज एक ‘आजाद हिंद रेडियो’ का इस्तेमाल करती थी, जो लोगों को आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित करती थी। बोस ने आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के साथ ही एक महिला बटालियन भी गठित की थी जिसमें उन्होंने रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया था और उसकी कैप्टन बनीं थी लक्ष्मी सहगल।

ऑस्ट्रिया में बंधे परिणय सूत्र में- सुभाष अपना इलाज कराने के लिए ऑस्ट्रिया गए थे जहां उनकी मुलाकात हुई एमिली शेंकल नाम की एक महिला टाइपिस्ट से। उस वक्त उन्हें भी अपनी पुस्तक टाइप कराने के लिए एक टाइपिस्ट की जरूरत थी। जान-पहचान बढ़ने के बाद सुभाष ने उनसे शादी कर ली। सुभाष चंद्र बोस की बेटी का नाम अनीता बोस है। हालांकि काफी समय तक लोगों को उनकी शादी के बारे में नहीं पता था।

Next Stories
1 Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Speech, Essay, Quotes: भेष बदलकर अंग्रेजों की गिरफ्त से भागे थे नेताजी, तैयार की थी ‘आजाद हिंद फौज’ नाम की अलग सेना
2 जल्दी नाश्ता और जल्दी डिनर, जानिए Shraddha Kapoor और क्या करती हैं फिट रहने के लिए
3 Winter Fashion: ठंड में फैशन से दूर क्यों? यहां जानिए क्या है विंटर वियर में लेटेस्ट ट्रेंड
यह पढ़ा क्या?
X