मुलायम सिंह यादव की इच्छा के खिलाफ डिंपल यादव ने लड़ा था चुनाव, परिवार का नाम लेकर ‘नेताजी’ ने बताई थी वजह

यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनकी बहू डिंपल ने साल 2009 का उप-चुनाव उनकी मर्जी के खिलाफ लड़ा था और उनके परिवार की महिलाएं चुनाव नहीं लड़ती हैं।

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अखिलेश यादव, डिंपल यादव के साथ मुलामय सिंह यादव (Photo- Indian Express)

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने साल 2012 में समाजवादी पार्टी के लिए खूब प्रचार किया था। चुनाव से पहले तक उन्होंने अखिलेश यादव के नाम पर मुहर नहीं लगाई थी। हालांकि बहुमत मिलने के बाद अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री बने थे। वहीं, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव भी सक्रिय राजनीति में हैं। साल 2009 में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने फिरोजाबाद से उप-चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

2012 के चुनाव प्रचार के दौरान मुलामय सिंह यादव से इस पर सवाल पूछा गया था। मुलायम से पूछा गया था, ‘एक बार आपकी बहू भी चुनाव लड़ गई थीं। क्या आपको लगता है कि वह दोबारा चुनाव लड़ें? या वह परिवार में ही ठीक हैं।’ इसके जवाब में उन्होंने कहा था, ‘हमारे परिवार में महिलाएं कभी चुनाव नहीं लड़ती हैं। वो तो हमारे कुछ ऐसे वरिष्ठ साथी और नेता थे, उन्होंने जबरदस्ती डिंपल को चुनाव लड़वा दिया था, हमारी इच्छा के विरुद्ध। लेकिन वो लड़वा दिया तो लड़वा दिया अब नहीं लड़ने देंगे।’

विधायक तय करते हैं सीएम: मुलायम सिंह यादव ने कहा था, ‘अब दोनों लोग नेता हो जाएंगे तो बच्चों की परवरिश कौन करेगा? एक व्यक्ति तो बच्चों की परवरिश करने के लिए भी चाहिए।’ जब मुलायम से अखिलेश को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा था, ‘राजनीति में जो मेहनत करता है वो आगे बढ़ता है। अखिलेश भी मेहनत करेगा तो आगे तो बढ़ेगा ही। अब मुख्यमंत्री का नाम तो पार्टी में चुनकर आए विधायक ही तय करते हैं।’

बता दें, 2012 के लोकसभा उप-चुनाव में कन्नौज सीट से निर्विरोध जीत हासिल कर डिंपल यादव पहली बार संसद पहुंची थीं। इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार संजू कटियार ने नॉमिनेशन वापस ले लिया था। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस ने इस उप-चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। इसके बाद साल 2014 में वह कन्नौज सीट से दोबारा चुनाव मैदान में उतरी थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में डिंपल ने बीजेपी उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी थी।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में कन्नौज सीट पर डिंपल यादव करीब 13 हजार मतों से हार गई थीं। बीजेपी के सुब्रत पाठक ने इसमें जीत हासिल की थी।

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