कांग्रेस में ऐसा क्या है कि सोनिया जी के पास बार-बार चाय पीने जाते हो? प्रभु चावला के सवाल पर ये दिया था मुलायम सिंह ने जवाब

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से एक इंटरव्यू में सोनिया गांधी को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने कुछ ऐसा जवाब दिया था।

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यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Photo- PTI)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया था कि वह इस चुनाव किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। पिछले चुनाव में अखिलेश कांग्रेस के साथ चुनाव मैदान में उतरे थे। यूपी में राहुल और अखिलेश ने साथ चुनाव प्रचार किया था। हालांकि इस गठबंधन का कोई फायदा नहीं हुआ था और समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी। यही वजह है कि उन्होंने इस बार अपनी रणनीति में बदलाव किया है। मुलायम सिंह यादव से भी एक बार वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने कांग्रेस को लेकर सवाल पूछा था।

प्रभु चावला ने सवाल पूछा था, ‘आप कभी कांग्रेस से नाराज़ होते हैं तो कभी कांग्रेस के करीबी बन जाते हैं। अचानक कांग्रेस में ऐसा क्या बदलाव आता है कि आप अचानक सोनिया जी के बंग्ले पर चाय पीने चले जाते हो?’ इसके जवाब में उन्होंने कहा था, ‘मैंने अपने बेटे की शादी में सोनिया जी को बुलाया। मैंने ईद के कार्यक्रम में सोनिया जी को बुलाया और दोनों ही जगह वो आईं। अब जब वो दोनों ही जगह आईं तो जाना हमारा भी तो फर्ज था। एक बार सोनिया जी फोन करके मुझे कहा कि हम आपके घर पर आना चाहते हैं।’

मुलायम आगे बताते हैं, ‘जब सोनिया जी ने घर पर आने की इच्छा जाहिर की तो मैंने उन्हें रोका और कहा कि हम आपके घर पर आएंगे। इस बार भी हमारी बात हुई तो उन्होंने कहा कि आप आ सकते हैं? मैंने कहा कि हम अभी आ रहे हैं। हमें कांग्रेस से फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। क्योंकि कांग्रेस अभी यूपी की सरकार को लेकर कुछ गंभीर नज़र नहीं आ रही है। कांग्रेस का प्रस्ताव कागज नहीं रहना चाहिए क्योंकि राजभवन में ही इस पर फैसला होगा। राजनीति में हम कोई विश्वास नहीं करते हैं। सांप्रदायिक नाम के राक्षस को हम सत्ता से दूर रखना चाहते हैं।’

राहुल को PM बनाने का समर्थन करेंगे? एक अन्य इंटरव्यू में मुलायम सिंह यादव से राहुल गांधी को लेकर पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, ‘जहां तक राहुल को प्रधानमंत्री बनाने का सवाल तो हम कहेंगे कि ये कांग्रेस पार्टी का आंतरिक मामला है। ये पार्टी ही तय करेगी कि उसका प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा। जहां तक हमारा समर्थन करने की बात है तो हम इसका फैसला चुनाव के बाद ही कर पाएंगे। हम कोई नहीं होते जो ये तय कर सकता है कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा और कौन नहीं?’

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