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मुकेश अंबानी हर बड़े कदम से पहले करते हैं इनसे सलाह-मशविरा, जानें कौन हैं उनके आध्यात्मिक गुरु

Mukesh Ambani: सिर्फ मुकेश ही नहीं, अनिल अंबानी के भी आध्यात्मिक गुरु एक ही हैं। खबरों के अनुसार दोनों भाई रमेश भाई ओझा को मानते हैं।

Mukesh Ambani, anil ambani, ramesh bhai ojha, mukesh ambani guruएक रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की शादी के वक्त भी रमेश भाई ओझा ने अहम भूमिका निभाई थी

Mukesh Ambani Spiritual Guru: दुनिया के सर्वाधिक अमीर लोगों की सूची में मुकेश अंबानी भी शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी की संपत्ति करीब 71.2 बिलियन डॉलर बतायी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके पास 170 के करीब गाड़ियां हैं। प्रोफेशनल दृष्टिकोण से हमेशा चर्चा में रहने वाले मुकेश अंबानी निजी तौर पर बेहद नम्र और धार्मिक व्यक्ति हैं। उन्हें कई धार्मिक कार्यक्रमों में जाते देखा जाता है। आइए जानते हैं कि मुकेश अंबानी के परिवार के आध्यात्मिक गुरु कौन हैं –

सिर्फ मुकेश ही नहीं, अनिल अंबानी के भी आध्यात्मिक गुरु एक ही हैं। खबरों के अनुसार दोनों भाई रमेश भाई ओझा को मानते हैं। वो गुजरात के पोरबंदर में संदीपनी विद्यानिकेतन और आश्रम को संभालते हैं, उसका संचालन करते हैं। बताया जाता है कि रमेश भाई ओझा अंबानी परिवार के साथ तब से हैं जब धीरूभाई अंबानी उंचाइयों पर पहुंच रहे थे। बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी मेमोरियल का उद्घाटन समारोह था, तब उस कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेशभाई ओझा ने ही की थी।

कई महत्वपूर्ण मौकों पर रहें साथ: एक रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की शादी के वक्त भी रमेश भाई ओझा ने अहम भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं, दोनों भाइयों यानी मुकेश और अनिल अंबानी के विवादों को सुलझाने में भी ‘भाईजी’ का अहम योगदान था। कहा जाता है कि मुकेश अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी के कहने पर उन्होंने दोनों भाईयों के बीच बंटवारे में दखल दिया था और सुलह के साथ कारोबारी साम्राज्य विभाजित हुआ था।

राम कथा के लिए जाते थे: रिपोर्ट्स के अनुसार मुकेश अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी शुरुआत से ही रमेश भाई ओझा के वीडियो देखती थीं। इससे प्रभावित होकर उन्होंने साल 1997 में उन्होंने रमेश भाई को अपने घर पर राम कथा वाचन के लिए बुलाया था। करीब सप्ताह भर चले इस धार्मिक कार्यक्रम के साथ ही अंबानी परिवार और ओझा के बीच संबंधों की शुरुआत हुई।

कई नामचीन लोग मानते हैं: खबरों के अनुसार जब सुषमा स्वराज ने गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की थी, तो इसके पीछे रमेश भाई ओझा ही थे। उन्होंने ही सुषमा स्वराज को ये विचार दिया था। यही नहीं, गुजरात के बड़े नामचीन नेता उनके आश्रम में आशीर्वाद प्राप्त करने आते थे। यहां तक कि पीएम मोदी भी उनकी बेहद इज्जत करते हैं।

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