scorecardresearch

सोने से भी महंगी है ये मछली, रख-रखाव का खर्च भी कम नहीं, जानिये क्यों है ये इतनी खास

जापान में ये मछलियां इतनी महंगी हैं क्योंकि 1980 के बाद इनकी आबादी में 75 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। आपको बता दें कि जापान में एक त्योहार के दौरान ईल मछली खाने की परंपरा है।

eel fish, eel fish cost
जापान में लोग ईल फिश को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं। (Image- Pixabay)

खानपान की संस्कृति हर देश में अलग-अलग होती है। भारत विविधताओं का देश है और यहां हर राज्य में अपना एक अलग खानपान है। ऐसे ही एक फूड्स के बारे में आपको जानकार हैरानी होगी कि जापान की एक बेहद खास मछली, जिसकी कीमत को जानकर व्यक्ति खरीदने से पहले सौ बार सोचे, लेकिन न खाए तो पछताए।

जापानी लोगों को सी-फूड (Sea-Food) बहुत पसंद है, इसे बड़े चाव से खाते हैं। जापान के सी फूड मार्केट में आपको वैसे तो अलग-अलग तरह की मछलियां के साथ उनके हाई फ़ाई दाम भी देखने को मिलेंगे। लेकिन इन्हीं में शामिल है जापान की मशहूर उनागी मछली। जापान में ताजे पानी में पाई जाने वाली उनागी प्रजाति की ईल मछली सोने के जितनी महंगी है। आपको बता दें कि बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक साल 2018 में इस मछली की कीमत 35 हजार डॉलर प्रति किलो का भाव रहा है। जो कि उस दौरान सोने की कीमत से भी महंगी थी।

जापानी लोगों को यह मछली बेहद प्रिय है, सालों से ये लोगों का पसंदीदा खाना है। जानकार ताज्जुब होगा कि सिर्फ जापान के होटल और रेस्तरां में करीब-करीब 50 टन ईल मछली हर साल बेची जाती है। इस मछली के बच्चों को पकड़कर ताजे पानी में बड़े होने तक पाला जाता है। एक साल के बाद ये बेचने लायक हो जाती हैं। यह मछलियां ज्यादातर पूर्व एशिया में पाई जाती हैं। इस मछली को पकड़ने के बाद एक प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर ऐसी क्या बात है जो इस मछली को बेहद खास और इतनी ज्यादा महंगा बनाती है।

इतनी महंगी क्यों हैं ये मछलियां?

जापान में पाई जाने वाली ये मछलियां इतनी महंगी इसलिए हैं क्योंकि 1980 के बाद इनकी आबादी में 75 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दरअसल उनागी मछली जापान की बेहद प्रसिद्ध मछली है लेकिन धीरे धीरे इसकी संख्या में भारी कमी होने लगी है। इसके पीछे की जो वजह सामने आई यही वह है ईल मछलियों का अत्यधिक शिकार। ईल और दूसरी मछलियों में इतना अंतर है कि दूसरी मछलियों को तब पकड़ा जाता है जब वो बड़ी हो चुकी होती हैं लेकिन उनागी मछली जब काफी छोटी होती हैं, तभी उन्हें पकड़ लिया जाता है।

दूसरा सबसे बाद कारण है इसके पालन पोषण में आने वाला भारी भरकम खर्च। बाजार में आमतौर पर बिकने वाली मछलियां सीधे पकड़कर बाजार में बेच दी जाती है। जबकि ईल मछली के बच्चों को पकड़कर उन्हें पालना पड़ता है। इन्हें चारा, गेहूं, सोयाबीन, मछलियों का तेल जैसा खाना खिलाया जाता है और इसमें अच्छा खासा खर्च हो जाता है।

एक साल तक करते हैं इनका पालन पोषण

उनागी मछलियों के बच्चों को पकड़कर एक साल तक पाला जाता है, क्योंकि इन मछलियों को बड़ा होने में 6 महीने से 12 महीने का वक्त लगता है। इन मछलियों को दिन में तीन बार भोजन दिया जाता है। बता दें कि उनागी मछलियों को पालने के दौरान बेहद सावधानी से रखा जाता है। अगर एक भी मछली को कुछ भी नुकसान पहुंचता है तो सारी मछलियां अपने आप खराब हो जाती हैं।

काटना और बनाने की विधि बेहद मुश्किल

जापान के रेस्टोरेंट्स में उनागी मछलियों की काफी ज्यादा डिमांड होती हैं। लेकिन ईल को बनाना कोई आसान बात नहीं है। कोई भी शेफ इस मछली को नहीं बना सकता है। इसे बनाने की विधि सीखने में कई साल लग जाते हैं। इसके साथ ही ईल मछली को काटना भी बेहद कठिन होता है। जापान में इसे काटने के लिए प्रशिक्षण लेना पड़ता है, इसे सीखने के लिए लोगों को जिंदगी गुजार देनी पड़ती है। वहीं, इस मछली को भूनना भी आसान नहीं होता है। ईल से बनी ग्रिलिंग भी जापान में बेहद महंगी बिकती है। इसकी कीमत 91 डॉलर बताई जाती है।

पढें जीवन-शैली (Lifestyle News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट