भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जहां पर हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। किसी को पहाड़ों की हसीन वादियों में प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताना पसंद है, तो किसी को देश की संस्कृति और इतिहास अपनी ओर आकर्षित करता है। आज भी कई ऐसी जगहें हैं जिसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है। यह देश एक से बढ़कर एक सुंदर और मनमोहक पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इन्हीं में से एक है मेचुका, जो अरुणाचल प्रदेश का एक खूबसूरत गांव है।
मेचुका की खूबसूरती इतनी मनमोहक है कि यहां आने के बाद शायद ही किसी का वापस जाने का मन करे। दूर-दराज पहाड़ों के बीच बसा एक ऐसा गांव जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां के पहाड़ों की खूबसूरती और घरों की बनावट देख हर कोई अपना दिल हार बैठे। यह गांव ऐसी जगह पर स्थित है, जहां से भरत-चीन की सीमा (LAC) करीब 29-30 किलोमिटर की दूरी पर है। यहां के ऊंचे पहाड़ों से आप चीन के पहाड़ी क्षेत्रों को देख सकते हैं। आइए जानते हैं इस गांव के बारे में और यहां घूमने लायक जगहें कौन-कौन सी हैं।
बेहद सुंदर के मेचुका घाटी
मेचुका घाटी चारों ओर बर्फ से ढकी ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरी हुई है। घाटी में फैले हरे-भरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे जंगली फूल और लकड़ी के पारंपरिक घर इसे और भी ज्यादा सुंदर बनाते हैं। खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा काफी मनमोहक होता है।
- सिंयाग (सियोम) नदी
मेचुका की खूबसूरत वहां से बहने वाली सियांग (सियोम) नदी बढ़ाती है। यह नदी मेचुका के बीचों-बीच बहती है, जो अपने साफ और ठंडे बहते पानी के लिए प्रसिद्ध है। नदी किनारे बैठकर आप सुकून के पल बिता सकते हैं। इसके साथ ही नदी किनारे कुछ देर टहल भी सकते हैं। सुबह के समय नदी के ऊपर तैरती हल्की धुंध का नजारा कमाल का होता है।
समतेन योंगचा मठ
मेचुका में समतेन योंगचा नामक एक मठ भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह लगभग 400 साल पुराना एक बौद्ध मठ है। यह मठ पहाड़ी पर स्थित है, जहां से पूरी घाटी का शानदार नजारा दिखाई देता है। मठ के अंदर आपको प्राचीन बौद्ध मूर्तियां, धार्मिक चित्र और पारंपरिक वास्तुकला देखने को मिल जाएगी।
हैंगिंग ब्रिज
मेचुका में लकड़ी और लोहे से बना हैंगिंग ब्रिज भी है, जो सियोम नदी के ऊपर बना हुआ है। पुल पर चलते समय आप बहती नदी और आसपास की पहाड़ियों का सुंदर दृश्य देख सकते हैं।
कौन सी जनजाती रहती है
मेचुका में मेम्बा जनजाती रहती है, जो अपनी अनोखी संस्कृति के लिए जानी जाती है। इनके घर मुख्य रूप से लकड़ी और बांस के होते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक पोशाक पहनते हैं और बौद्ध धर्म का पालन करते हैं।
ट्रेकिंग भी कर सकते हैं
मेचुका के आसपास कई ऐसी प्राकृतिक खूबसूरत जगहें हैं जहां आप ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं। ट्रेकिंग के दौरान घने जंगल, पहाड़ी घास के मैदान, छोटी-छोटी नदियां और झरने आपकी यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना सकते हैं।
कैसे पहुंचे मेचुका
मेचुका अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी जिले में स्थित है। यह सड़ मार्ग से जुड़ा हुआ है, हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए थोड़ा लंबा सफर तय करना पड़ सकता है। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट मेचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड है जहां से सीमित उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं। डिब्रूगढ़ (असम) सबसे सुविधाजनक हवाई अड्डा माना जाता है।
इसके अलावा आप ट्रेन से भी मेचुका पहुंच सकते हैं। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मुरकोंगसेलेक (असम) है। यहां से टैक्सी के जरिए मेचुका पहुंच सकते हैं।
अगर सड़क मार्ग से मेचुका जाना चाहते हैं तो ईटानगर, पासीघाट और आलो से यहां टैक्सी से जा सकते हैं। आलो से मेचुका की दूरी लगभग 190 किलोमीटर है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश जाने से पहले भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (ILP) लेना अनिवार्य है। इसे आप ऑनलाइन या अरुणाचल प्रदेश सरकार के मान्यता प्राप्त केंद्रों से आसानी से ले सकते हैं।
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