पैर की हील से गले की चेन तक, कांशीराम के साथ अपनी मूर्ति में मायावती ने करवा दिए थे कई बदलाव

बीएसपी सुप्रीमो मायावती की मूर्ति बनाने वाले श्रवण प्रजापति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह इसको लेकर कई घंटे तक चर्चा करती थीं कि मूर्तियों में क्या सुधार हो सकता है।

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बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Photo- Indian Express)

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने अगले साले होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मायावती से साफ कर दिया है कि वह इस बार किसी बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव नहीं लड़ेंगी। ऐसा ही साल 2007 में हुआ था जब बीएसपी को यूपी की जनता ने बहुमत दिया था और मायावती सूबे की सीएम बनी थीं। ये पहली बार था जब उन्होंने बतौर सीएम अपना कार्यकाल पूरा किया था।

मायावती के विरोधी उनके द्वारा बनाए गए पार्कों और मूर्तियों को चुनावों में मुद्दा बनाते हैं। मूर्तियों से जुड़ा किस्सा मूर्तिकार ने भी एक इंटरव्यू में सुनाया था। साल 2009 में मायावती की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार श्रवण प्रजापति ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘बहन जी एक-दो घंटे सिर्फ इस पर विचार करती हैं कि इसमें और क्या सुधार हो सकता है। गले में चेन, हाथ की घड़ी, एड़ी की हील बिल्कुल क्लियर नज़र आनी चाहिए। हमने पहले कांशीराम से मायावती की मूर्ति का कद छोटा बनाया था। लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि हमारी और कांशीराम जी की मूर्ति का कद बराबर होना चाहिए।’

भ्रष्टाचार का आरोप: मायावती ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 26 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स भरा था। ये किसी भी राजनेता के द्वारा भरा जाने वाला उस समय का सबसे ज्यादा आयकर था। इसके बाद विरोधियों ने मायावती पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगाए थे। मायावती ने अपनी सफाई में तत्कालीन यूपीए सरकार पर अपनी ताकत का गलत फायदा उठाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, ‘केंद्र की यूपीए सरकार उन्हें डराने के लिए संपत्ति को निशाना बना रही है और जबरन सीबीआई को यूपी जांच के लिए भेजा जा रहा है।’

वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला से बात करते हुए मायावती ने कहा था, ‘मैं ऐसा तो नहीं कह सकती कि किसी डरती नहीं हूं, लेकिन केंद्र सरकार का उद्देश्य मेरी छवि खराब करना है। यही वजह है कि मेरे खिलाफ सीबीआई जांच शुरू कर दी गई है। लगातार मेरे खिलाफ सीबीआई से झूठे केस लगवाए जा रहे हैं। एक बात सरकार को ध्यान रहे कि मैं डरने वाली नहीं हूं और सभी आरोपों का डटकर सामना करूंगी।’

बता दें, मायावती साल 1995 में पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। हालांकि वह लंबे समय तक कुर्शी पर नहीं रह सकीं। इसके बाद 1997 में दूसरा मौका आया जब उन्हें सीएम बनने का मौका मिला, लेकिन एक बार फिर वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। वह कुल चार बार सूबे की सीएम बन चुकी हैं, लेकिन साल 2007-2012 तक पहली बार उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया था।

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