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हम एक साल में अंग्रेज़ी सीख लेते हैं वो 40 साल में हिंदी नहीं सीख पाईं- मेनका गांधी ने कुछ यूं मारा था सोनिया गांधी को ताना

मेनका गांधी ने एक बार सोनिया गांधी की हिंदी पर चुटकी ली थी। उन्होंने कहा था कि सोनिया गांधी को भारत में रहते कई दशक हो गए हैं लेकिन वो अभी तक हिंदी नहीं सीख पाईं हैं बल्कि इंग्लिश में लिखी हिन्दी देखकर पढ़तीं हैं।

मेनका गांधी और सोनिया गांधी कभी अच्छे दोस्त थे (Photo-Indian Express/File/AICC)

कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी की हिंदी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती ही रहती है। ठीक से हिंदी न बोल पाने के कारण विपक्षी नेता कई मौकों पर चुटकी लेते दिखे हैं। उनकी देवरानी और बीजेपी सांसद मेनका गांधी ने भी एक बार उनकी हिंदी पर चुटकी ली थी। मेनका गांधी ने कहा था कि सोनिया गांधी को भारत में रहते कई दशक हो गए हैं लेकिन वो अभी तक हिंदी नहीं सीख पाईं हैं बल्कि इंग्लिश में लिखी हिन्दी देखकर पढ़तीं हैं।

साल 2012 में मेनका गांधी ने अपनी जेठानी की हिंदी पर मीडिया के सामने तंज कसा था। मेनका गांधी ने कहा था, ‘अब उनको 40 साल से ज्यादा हो गए हैं हिंदुस्तान में और अभी भी वो अपनी स्पीच पढ़ती हैं। वो स्पीच भी अंग्रेजी में लिखी जाती है। मुझे नहीं मालूम कौन लिखता है, इतना मुझे मालूम है कि लिखने की जरूरत ही क्या होती है।’

मेनका गांधी आगे कहती हैं कि हमारे देश के लोग विदेशों में जाकर वहां की भाषा एक साल में सीख जाते हैं तो फिर सोनिया गांधी क्यों नहीं सीख पाईं। उन्होंने कहा, ‘हमारे लोग इंग्लैंड जाते हैं, अमेरिका जाते हैं, एक शब्द अंग्रेजी का नहीं जानते हैं और एक साल के अंदर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं तो अगर हम लोग सीख सकते हैं आराम से तो वो भी सीख सकते हैं हिंदी।’

इसके बाद के वर्षों में भी मेनका गांधी ने सोनिया गांधी पर कई हमले किए। साल 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान मेनका गांधी ने सोनिया गांधी की संपत्ति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सोनिया गांधी पर खूब हमले किए थे और कहा था कि इतना पैसा वो इटली से दहेज में लेकर आई थीं क्या।

सोनिया गांधी और मेनका गांधी के रिश्ते हमेशा से ऐसे नहीं थे। सोनिया और राजीव की शादी के 5 सालों बाद 23 सितंबर 1974 में मेनका गांधी की शादी संजय गांधी से हुई। तब गांधी परिवार की बहुओं में काफी प्रेम था और दोनों सहेलियों की तरह रहा करती थीं।

सोनिया गांधी और राजीव गांधी को राजनीति से लगाव नहीं था, इधर संजय गांधी इंदिरा गांधी के उत्तराधिकारी माने जाते थे और मेनका गांधी को भी राजनीति में काफी दिलचस्पी थी।

लेकिन 1980 में अचानक संजय गांधी की विमान हादसे में मृत्यु हो गई जिसके बाद मेनका गांधी काफी टूट गई थीं। जब इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी को अपना उत्तराधिकारी बनाने की बात की तो मेनका गांधी को इससे बड़ा झटका लगा था।

लेखक जेवियर मोरो की किताब के मुताबिक, मेनका गांधी संजय गांधी की राजनीतिक विरासत संभालने का सपना देख रही थीं लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो वो इंदिरा गांधी से अक्सर एतराज जताती थीं।

 

कहा जाता है कि दोनों के बीच बात इतनी बढ़ी कि इंदिरा गांधी ने 1982 में मेनका गांधी को घर से निकाल दिया था। इस विवाद का असर सोनिया और मेनका गांधी के रिश्तों पर हुआ था।

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