एक्ट्रेस मंदिरा बेदी हाल ही में अपने दिवंगत पति राज कौशल को याद करते हुए भावुक हो गईं। अपनी फिल्म मैक्स मिन म्याऊजाकी के ट्रेलर लॉन्च के दौरान एक्ट्रेस और होस्ट ने बताया कि किस तरह पति के गुजर जाने के बाद थेरेपी ने उन्हें इस दुख से उभरने में मदद की। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल पहले उन्होंने थेरेपी का सहारा लिया था।
जब थेरेपी वाली बात मंदिरा बेदी ने अपनी मां को बताई, तो उन्होंने पूछा क्यों? तुम्हें क्या हुआ? तब उन्होंने मां को बताया कि वह अपने मन में चल रही चीजों को बाहर निकालना चाहती थीं। भावुक होते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्हें अपने जीवन में कुछ गलत या असंतुलित महसूस हुआ, तो उन्होंने थेरेपिस्ट और काउंसलर की मदद ली। इससे उन्हें फायदा हुआ।
एक्ट्रेस ने बताया कि जब मैंने अपने पति को खोया, तो थेरेपी मेरे लिए एक सहारा बन गई। इसलिए मैंने इसका सहारा लिया। बता दें कि राज कौशल का निधन साल 2021 में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।
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समय बीतने पर भी रहती हैं यादें
मंदिरा बेदी की बात उन कई लोगों के अनुभव से जुड़ती है, जिन्होंने अपने जीवनसाथी को खोया है। समय बीतने के साथ-साथ दुख भले ही कम हो जाए, लेकिन प्यार और यादें खत्म नहीं होती। इस विषय पर इंडियन एक्सप्रेस ने साइकोथेरेपिस्ट और लाइफ कोच डेल्ना राजेश से बात की। उनके मुताबिक साल गुजरने के बाद भी कुछ बातें, खास तारीखें, गाने या यादें आंखों में आंसू ला सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति दुख से बाहर नहीं निकल पाया है, बल्कि यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उस रिश्ते की उनके जीवन में बहुत खास जगह थी।
डेल्ना राजेश के अनुसार, लोगों को अक्सर यह लगता है कि दुख से उभरने का भी एक तय समय होता है। उन्हें लगता है कि 6 महीने या 1 साल बाद व्यक्ति पूरी तरह सामान्य हो जाता है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति का दुख और उससे उभरने का तरीका अलग होता है। कई बार व्यक्ति हंसता है, काम करता है और अपनी जिंदगी सामान्य तरीके से जीता है, लेकिन किसी फोटो या पुरानी याद से फिर भावुक हो सकता है। उनके अनुसार दुख से उभरने की प्रक्रिया सीधी नहीं होती बल्कि यह अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है।
पति को खोने का दुख मानसिक तौर पर सबसे गहरा हो सकता है क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति को खाना नहीं होता। बल्कि उसके साथ जुड़े भविष्य, यादों और रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा भी खो जाता है। वही व्यक्ति जो हर सुख-दुख में साथ था, आपकी आदतों को समझता था। आपकी चुप्पी को समझता है और सपनों का साथी होता है, उसके जाने के बाद जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है।
हम कैसे कर सकते हैं मदद
अगर कोई व्यक्ति इस दुख से गुजर रहा है, तो हम उसे समझाने या सलाह देने की बजाय उसके साथ रह सकते हैं। अक्सर लोग उन्हें दिलासा देने के लिए कहते हैं, कि मजबूत बनो, जो होता है अच्छे के लिए होता है या समय सब ठीक कर देता है। लेकिन कई बार ऐसी बातें सामने वाले को यह अहसास करा सकती है कि उसकी भावनाएं कोई सही तरह से नहीं समझ पा रहा है। ऐसे समय में उनकी परेशानियों को सुलझाने के बजाय सिर्फ उनके साथ बैठना मानसिक रूप से सहारा दे सकता है।
जीवनसाथी को खो चुके व्यक्ति को कैसे दे सकते हैं सहारा?
- अगर किसी का पति गुजर गया है तो उसके साथ लंबे समय तक संपर्क बनाए रखें। क्योंकि जब सभी लोग सामान्य जीवन में लौट जाते हैं, तो शोक अक्सर और भी अकेलापन भर देता है। ऐसे में उनका साथ देना और उनसे बातें करना दुख को कम करने में मदद कर सकता है।
- उन्हें अपने जीवनसाथी के बारे में खुलकर बात करने दें। यह महसूस न कराएं कि अब उन्हें सब कुछ भूलकर आगे बढ़ जाना चाहिए।
- अगर किसी चीज की जरूरत हो तो बताना, कहने की बजाय आप उनके साथ रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों, खाने की व्यवस्था और जरूरी कागजी काम में उनकी मदद कर सकते हैं।
- उनके जीवनसाथी के जन्मदिन, वेडिंग एनिवर्सरी और निधन की तारीख जैसे खास दिनों को याद रखें। ये दिन उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी मुश्किल हो सकते हैं।
- अगर दुख की वजह से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है और वह लगातार निराशा और डिप्रेशन महसूस करने लगें, तो उन्हें किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने के लिए कह सकते हैं।
किसी व्यक्ति के गुजर जाने के बाद उसे भुलाना आसान नहीं होता। ऐसे समय में उनकी यादों और प्यार को अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखते हुए आगे बढ़ना ही दुख से उभरने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।
