हिमाचल प्रदेश दुनिया की उन जगहों में से एक है जहां पर हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। यहां के बर्फ की सफेद चादर ओढ़े ऊंचे-ऊचे पहाड़, घने जंगल, आसमान को छूते देवदार के पेड़ और हरियाली से भरी वादियों का दृश्य काफी मनमोहक होता है। इन्हीं वादियों में कई ऐसी कहानियां तैरती हैं जिनके बारे में यकीन कर पाना थोड़ा मुश्किल है। हिमाचल प्रदेश का हर गांव अपने अंदर कई कहानियां समेटे हुए है। इन्हीं में से एक गांव ऐसा है जहां पर बिना अनुमति आप कुछ भी छू नहीं सकते हैं। यहां के कायदे-कानून बिल्कुल अलग हैं।
दरअसल, यह कोई और नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित मलाणा गांव है, जो पार्वती घाटी में बसा हुआ है। यह गांव अपनी अनूठी संस्कृति, पहनावे, खान-पान, सख्त सामाजिक नियमों और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं इस गांव के बारे में कुछ दिलचस्प बातें।
मलाणा गांव का अपना नियम हैं। यहां बाहरी लोगों को गांव की किसी भी चीज, गांव के लोगों या मंदिरों को हाथ लगाने की अनुमति नहीं होती। अगर कोई बाहरी व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर 2,500 से 3,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि यदि किसी गांव वाले को कोई बाहर व्यक्ति छू ले, तो वह अपनी परंपरा के अनुसार स्नान करता है।
इस गांव में हर साल भारी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में जरूरत का सामान आप सीधे तौर पर नहीं खरीद सकते हैं। मलाणा गांव में लेन-देन का तरीका भी काफी अलग है। सामान खरीदते समय लोग पैसे सीधे हाथ में देने के बजाय जमीन पर रख देते हैं, ताकि एक-दूसरे को छूना न पड़े। इसके बाद दुकानदार सामान को जमीन पर रखता है। गांव के लोग इन नियमों का सख्ती से पालन करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे गांव की परंपराएं और सांस्कृतिक पवित्रता बनी रहती हैं।
किस भगवान को मानते हैं
मलाणा के लोग जमलू देवता की पूजा करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जमलू देवता की पूजा आर्य काल से भी पहले से की जाती रही है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जमलू ऋषि मलाणा गांव में आकर बसे थे और उन्होंने यहां के लोगों के लिए नियम और कानून बनाए थे। मलाणा की वादियों में सुनाई जाने वाली लोककथाओं में जमलू देवता को केवल एक देवता नहीं, बल्कि गांव की संस्कृति और पहचान का प्रतीक माना जाता है। मलाणा गांव के लोगों का मानना है कि, जमलू देवता गांव के नियम, न्याय, सामाजिक व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा के संरक्षक हैं। हालांकि, जमलू देवता को लेकर कई और मान्यताएं हैं।
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सिकंदर से क्या है नाता
मलाणा गांव के लोगों का मानना है कि वह सिकंदर महान के वंशज हैं। यहां के लोग मानते हैं कि वह सिकंदर महान की सेना के उन सैनिकों के वंशज हैं, जो युद्ध के दौरान घायल होने के कारण इसी क्षेत्र में रह गए थे। हालांकि, इस दावे के समर्थन और ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे सिर्फ स्थानीय लोकमान्यता माना जाता है।
कौन सी भाषा बोलते हैं
मलाणा गांव के लोग कनाशी भाषा बोलते हैं। यह भाषा मुख्य रूप से केवल यहीं के लोग बोल और समझ सकते हैं। कनाशी भाषा आसपास के गांवों में बोली जाने वाली किसी भी बोली से मेल नहीं खाती है। इसमें संस्कृत और तिब्बती भाषाओं की कई बोलियों का प्रभाव देखने को मिलता है।
कमाई का जरिया
पहले के समय में मलाणा गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से भांग से बनने वाले टोकरे, रस्सियां और चप्पलें बनाने पर आधारित थीं। इन चीजों को बनाकर लोग अपनी आजीविका चलाते थे। मलाणा में मक्का और आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। आज के समय में पर्यटन मलाणा की आय का एक प्रमुख स्रोत बन चुका है। हालांकि, मलाणा क्रीम भी पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है। यह भांग के पौधों से प्राप्त राल से तैयार किया जाने वाला एक उत्पाद है, जिसे चरस कहते हैं। पार्वती घाटी में घुने वाले कैनाबिस के पौधों से इसे बनाया जाता है। यह अपनी उच्च शुद्धता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।
कैसे पहुंचे मलाणा
मलाणा गांव तक सीधे वाहन नहीं जाते। यहां पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता है। सबसे पहले कुल्लू जिले के जरी कस्बे से सड़क मार्ग के जरिए मलाणा गेट पहुंचना होता है। इसके बाद 2-3 घंटे तक पैदल चढ़ाई वाला ट्रेक करना पड़ता है। इस दौरान रास्ते में सुंदर पहाड़ों, देवदार के जंगलों और झरनों से होकर गुजरना होता है, जिनका नजारा काफी शानदार होता है।
मलाणा के आसपास घूमने लायक जगहें
1- पार्वती घाटी
मलाणा इसी खूबसूरत घाटी का हिस्सा है। पार्वती घाटी ऊंचे-ऊंचे पहाड़, देवदार के जंगल, बहती पार्वती नदी और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। खासकर प्रकृति प्रेमियों के बीच यह घाटी काफी मशहूर है। यहां आप ट्रेकिंग और कैंपिंग का भी आनंद उठा सकते हैं।
2- कसोल
कसोली को मिनी इजरायल भी कहा जाता है। यहां पर बड़ी संख्या में हर साल इजरायल से पर्यटक आते हैं। इसके साथ ही यहां पर इजरायली परंपरा और संस्कृति भी देखने को मिल सकती है। मलाणा से कसोल 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां नदी किनारे कैफे, स्थानीय बाजार, ट्रेकिंग और शांत माहौल के बीच वक्त गुजारना काफी सुकून भरा रहता है।
3- खीरगंगा
अगर आपको ट्रेकिंग पसंद है, तो आप खीरगंगा जा सकते हैं। मलाणा से 40-45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खीरगंगा पहुंचने के लिए करीब 14-16 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। इस दौरान रास्ते में पहाड़, झरने, हरी वादियां आपके ट्रिप को और भी यादगार बना देंगी। खीरगंगा पहुंचने पर एक शांत वातावरण मिलता है। सुबह के वक्त जब सूरज की पहली रोशनी पड़ती है, पहाड़ सुनहरे हो जाते हैं। यह दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। यहीं पर एक प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड भी है, जहां पर भीषण ठंड में भी पानी गरम रहता है।
4- तोष वैली
तोष वैली एक छोटा और बेहद सुंदर पहाड़ी गांव है, जहां से बर्फ से ढकी चोटियां और हरी-भरी घाटियों का शानदार नजारा देखने को मिलता है।
5- चलाल
अगर आप सुकून के पल और प्रकृति के बीच शानदार लम्हों को कैद करना चाहते हैं तो चलाल जा सकते हैं। यह मलाणा से 30-35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से सबसे पास में कसोल है। यहां आप भीड़-भाड़ से दूर कुछ समय सुकून से बिता सकते हैं।
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