मलाइका अरोड़ा अपनी फिटनेस को लेकर अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं। अभिनेत्री की फिटनेस को देखकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि वह 52 साल की हैं। अभिनेत्री हमेशा से ही स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती रहती हैं। वह नियमित रूप से योग करती हैं और संतुलित आहार लेती हैं। लेकिन मलाइका का कहना है कि वह नाश्ता नहीं करती हैं, जबकि नाश्ते को दिन का सबसे जरूरी भोजन माना जाता है।

मलाइका अरोड़ा ने 2019 में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि, “मैं आमतौर पर नाश्ता नहीं करती, क्योंकि मैं उपवास करती हूं। मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हूं, इसलिए नाश्ता नहीं करती। मैं सीधे दोपहर का खाना खाती हूं। दोपहर के खाने में दाल, सब्जी, रोटी और चावल लेती हूं। मैं कोशिश करती हूं कि सभी चीजें ऑर्गेनिक हों। रात के खाने में सूप हो सकता है। मुझे खिचड़ी बहुत पसंद है और मैं इसे भी खाती हूं।” ऐसे में आइए जानते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग का शरीर पर क्या असर पड़ता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक तरह का खान-पान का तरीका है, जिसमें कुछ समय तक खाना खाया जाता है और कुछ समय तक उपवास रखा जाता है। सामान्य डाइट में इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि क्या खाना है, जबकि इंटरमिटेंट फास्टिंग में इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि किस समय खाना है। इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने मणिपाल अस्पताल द्वारका की न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स कंसल्टेंट डायटीशियन वैशाली शर्मा से इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने बताया, “उपवास के दौरान शरीर शुगर से मिलाने वाली ऊर्जा के बजाए शरीर में जमा फैट को ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करने लगता है।”

क्या खाने का समय महत्वपूर्ण होता है

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग सही तरीके से की जाए तो इसके कुछ फायदे हो सकते हैं। इससे वजन कम करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और शरीर में सूजन कम करने में मदद मिल सकती है। इससे शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बेहतर हो सकता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के लिए कई तरह के फास्टिंग विंडो (समय तय होता है, जिसके दौरान व्यक्ति को कुछ भी कैलोरी वाला खाना नहीं खाना होता है)। इनमें सबसे ज्यादा इसके तरीके लोकप्रिय हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रमुख तरीके

16/8 तरीका: इसमें 16 घंटे तक उपवास रखा जाता है और 8 घंटे के दौरान खाना खाया जाता है। उदाहरण के लिए, आप नाश्ता छोड़कर दोपहर 12 बजे खाना खा सकते हैं और रात 8 बजे तक डिनर कर सकते हैं।

5:2 तरीका: इसमें सप्ताह के 5 दिन सामान्य रूप से खाना खाया जाता है और 2 दिन उपवास रखा जाता है। हालांकि, उपवास लगातार 2 दिन नहीं रखना चाहिए, इसके लिए अलग-अलग दिन चुन सकते हैं। उपवास वाले दिनों में करीब 500-600 कैलोरी लेने की सलाह दी जाती है।

ईट-स्टॉप-ईट: इसमें सप्ताह में एक या दो बार 24 घंटे तक कुछ न खाने का उपवास रखा जाता है।

कब शुरू करना चाहिए इंटरमिटेंट फास्टिंग

अगर आप पहली बार इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं तो शुरुआत कम समय के उपवास से करें और धीरे-धीरे इसकी अवधि बढ़ाएं। डायटीशियन वैशाली के अनुसार, “शुरुआत में सीधे 16 घंटे का उपवास करने के बजाए करीब 7 घंटे से शुरुआत करना बेहतर होता है। इससे शरीर धीरे-धीरे इस प्रक्रिया के अनुसार खुद को ढाल पाता है। खाने के समय पौष्टिक और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करें।”

ध्यान रखने वाली बातें

उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। आप बिना चीनी की चाय या ब्लैक कॉफी भी ले सकते हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझें। अगर उपवास के दौरान आपको असहज महसूस हो या तबीयत खराब लगे तो उपवास तोड़ दें और किसी दूसरे समय दोबारा कोशिश करें।

ऑर्गेनिक चीजें क्यों खानी चाहिए

गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स की सीनियर डायटीशियन वंशिका भारद्वाज ने बताया कि प्राकृतिक या कम प्रोसेस की गई चीजों को शरीर के लिए पचाने में आसानी होती है। इससे पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए ज्यादा प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों की तुलना में प्राकृतिक और कम प्रोसेस की गई चीजों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान मिली जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई डाइट या दिनचर्या को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

यह भी पढ़ें
क्या टीथ व्हाइटनिंग से साफ हो जाते हैं दांतों पर जमे दाग, किन लोगों को नहीं करवाना चाहिए