पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं को ताजे फूल अर्पित करना हमारी परंपरा का अहम हिस्सा है। पूजा समाप्त होने के बाद या फिर जब फूल मुरझाने लगते हैं तो अक्सर इन्हें नदी-तालाब में प्रवाहित कर दिया जाता है या फिर कूड़ेदान में फेंक दिए जाते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि ये फूल बेकार नहीं होते हैं, बल्कि घर के कई कामों में बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। खासतौर पर गार्डनिंग करने वालों के लिए ये फूल काम आ सकते हैं।
दरअसल, फूलों में प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इनकी मदद से आप घर पर ही जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। अगर आपके घर की बालकनी या गार्डन में लगे पौधे सूखने लगे हैं, मुरझा रहे हैं या उनकी ग्रोथ धीमी हो गई है, तो यह प्राकृतिक खाद उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और उनकी ग्रोथ भी बेहतर होती है। साथ ही इससे न सिर्फ पैसे की बचत होती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। आइए जानते हैं पूजा में चढ़ाने वाले फूलों को अपने पौधों के लिए जैविक खाद कैसे बनाएं।
फूलों को इकट्ठा करने का सही तरीका
रोज पूजा में चढ़ाए जाने वाले फूलों को अलग से कुछ दिनों के लिए इकट्ठा करना शुरू कर दें। फूलों के साथ प्लास्टिक, धागे, फॉयल, रिबन या अगरबत्ती की लकड़ी जैसी चीजें न मिली हों। इन्हें फूलों से अलग कर दें। क्योंकि, ये सड़ती नहीं हैं और खाद बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बाद फूलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें या फिर हाथों से हल्का मसल दें। ऐसा करने से फूल जल्दी गलते-सड़ते हैं और कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। अगर ज्यादा मात्रा में फूल इकट्ठा हो गए हैं, तो उन्हें एक ढक्कन वाले डिब्बे या बाल्टी में जमा करके रख दें।
खाद बनाने की पहली प्रक्रिया
खाद बनाने के लिए एक पुराना गमला, बाल्टी, ड्रम या फिर प्लास्टिक का बड़ा डिब्बा ले लें। कंटेनर के नीचे छोटे-छोटे छेद कर दें, ताकि हवा का आवागमन बना रहे और अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। इससे कंपोस्टिंग की प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है। कंटेनर में सबसे पहले सूखे पत्तों, कागज के टुकड़ों या थोड़ी मिट्टी की एक पतली परत बिछा दें।
फूलों के साथ इन चीजों का भी करें इस्तेमाल
यह परत कंपोस्टिंग की शुरुआत के लिए जरूरी होती है और नीचे नमी को भी संतुलित रखने में मदद करती है। अब इसके ऊपर इकट्ठा किए हुए फूलों की एक परत फैला दें। इसमें किचन वेस्ट (सब्जियों-फलों के छिलके और चायपत्ती) भी मिला सकते हैं। इससे खाद में और ज्यादा पोषक तत्व मिल जाते हैं, जिससे यह पौधों के लिए और भी असरदार बनती है। अब इन फूलों के ऊपर थोड़ी मिट्टी डाल दें। इससे बदबू नहीं आती और सड़ने की प्रक्रिया भी संतुलित तरीके से चलती रहती है।
कितने दिन में तैयार होती है नेचुरल खाद
कंटेनर में जब फूल, मिट्टी और किचन वेस्ट की परतें तैयार हो जाएं, तो उस पर ऊपर से हल्का-सा पानी छिड़क दें। ज्यादा पानी नहीं मिलाना चाहिए, बस इतनी नमी होनी चाहिए कि मिश्रण हल्का गीला रहे। ज्यादा पानी डालने से कंपोस्ट में बदबू आने लगती है। इस कंटेनर को किसी ऐसी जगह पर रखें जहां पर छाया हो। साथ ही हर 3-4 दिन के अंतराल में लकड़ी या किसी डंडे की मदद से मिश्रण को हल्का पलटते रहें। ऐसे करने से इसमें हवा पहुंचती रहती है और सड़ने की प्रक्रिया तेज और बेहतर तरीके से होती है। इस जैविक खाद को तैयार होने में 20 से 30 दिनों का समय लग सकता है। इतने दिनों के बाद फूल और बाकी जैविक चीजें पूरी तरह गलकर भुरभुरी मिट्टी जैसी खाद में बदल जाती हैं, जो आपके पौधों के लिए तैयार प्राकृतिक और पौष्टिक खाद होती है।
कैसे करें इस्तेमाल
जब खाद पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे गमलों या फिर गार्डन की मिट्टी में मिला सकते हैं। एक गमले में 1 से 2 मुट्ठी खाद मिलाना काफी होता है। गमले की मिट्टी का कुछ भाग बाहर निकाल लें। अब इस मिट्टी में ये नेचुरल खाद को अच्छी तरह से मिला दें। इसके बाद मिट्टी को वापस गमले में डालकर ऊपर से हल्का पानी छिड़ दें। इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनकी जड़ें मजबूत होती हैं। पत्तियां हरी-भरी रहती हैं और पौधों की ग्रोथ भी तेजी से होती है।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।
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