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Gandhi Jayanti 2018: अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए देश को मांसाहारी बनाना चाहते थे बापू!

Mahatma Gandhi Jayanti 2018: अपनी आत्मकथा में महात्मा गांधी ने लिखा है कि जब वह हाईस्कूल में पढ़ते थे तब उनके एक मित्र ने उन्हें मांसाहार के लिए प्रेरित किया।

Gandhi Jayanti 2018: महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सत्य के साथ अनेक प्रयोग किए हैं। अपनी आत्मकथा माय एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ में उन्होंने इनमें से कई के बारे में विस्तार से चर्चा की है।

Mahatma Gandhi Jayanti 2018: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनन्य नायक महात्मा गांधी की 150वीं सालगिरह इस साल मनाई जा रही है। 2 अक्टूबर 1969 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने भारत को अंग्रेजों के 200 सालों की गुलामी से आजाद कराने के लिए सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे अभिनव राजनैतिक आंदोलनों का सफलतम प्रयोग किया था। उनका यह प्रयास बेहद सफल रहा था। उनकी अहिंसक क्रांति के आगे अंग्रेजों के अत्याचारों ने घुटने टेक दिए और अंततः 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर अपने देश वापस लौट गए। आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के योगदान को देखते हुए हर साल उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि स्‍वतंत्रता संग्राम में महात्‍मा गांधी ने देश के करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्‍व किया था। महात्‍मा गांधी अहिंसा और सत्‍याग्रह के दम पर अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ शस्त्र नहीं उठाया। जो लोग सशस्त्र क्रांति के समर्थक भी रहे गांधीजी ने उनका मुखर होकर विरोध किया। उनका मानना था कि अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलकर जब आजादी हासिल की जा सकती है तो उसके लिए खून बहाना सही नहीं है।

महात्मा गांधी की व्यक्तिगत जिंदगी भी तमाम मानवीय आदर्शों की व्यवहारिक प्रयोगशाला रही है। हर परिस्थिति में सत्य का समर्थन करने वाले गांधीजी आधुनिक विश्व में मानवीय मर्यादाओं के सर्वमान्य प्रतीक की तरह हैं। उन्होंने अपने जीवन में सत्य के साथ अनेक प्रयोग किए हैं। अपनी आत्मकथा माय एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ “ में उन्होंने इनमें से कई के बारे में विस्तार से चर्चा की है। गांधीजी आस्तिक प्रवृत्ति के थे और भगवान में बहुत दृढ़ विश्वास रखते थे। इसलिए शास्त्र सम्मत हर बुराई से दूर रहने को वह अपना धर्म मानते थे। गांधीजी का परिवार वैष्णव मत का अनुयायी था और उनके परिवार में मांस-मदिरा इत्यादि का सेवन पूरी तरह से वर्जित था। उनकी माता धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। ऐसे में उनके संस्कारों की वजह से महात्मा गांधी मांस-मदिरा इत्यादि से हमेशा दूर ही रहे। पढ़ाई के लिए महात्मा जब देश से बाहर जाने लगे थे तब उनकी माता ने उनसे मांस-मदिरा का सेवन न करने का वचन लिया था। लेकिन, महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी एक ऐसी घटना भी है जिसमें उन्होंने मांसाहार किया है। इतना ही नहीं, उस दौरान गांधीजी समूचे देश को भी मांसाहारी बनाने की इच्छा रखते थे। अपनी आत्मकथा में उन्होंने अपने जीवन में मांस खाने की पहली घटना के बारे में लिखा है।

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अंग्रेजों को भगाने के लिए खाया मांस – अपनी आत्मकथा में महात्मा गांधी ने लिखा है कि जब वह हाईस्कूल में पढ़ते थे तब उनके एक मित्र ने उन्हें मांसाहार के लिए प्रेरित किया। गांधीजी लिखते हैं कि उन मित्र ने उन्हें बताया कि अंग्रेज हम पर राज करते हैं क्योंकि वे मांसाहारी हैं। हम मांसाहार नहीं करते इसलिए प्रजा के रूप में हम कमजोर हैं। गांधीजी कहते हैं कि ये सारी दलीलें कई बार अनेक उदाहरणों से सजाकर उनके सामने रखी गई जिसके बाद उन्हें विश्वास हो गया कि मांसाहर से वह बलवान और साहसी हो सकते हैं। इसलिए, न सिर्फ उन्हें बल्कि समूचे देश को मांसाहार करना चाहिए। ताकि अंग्रेजों को हराया जा सके। इसके बाद माता-पिता से छिपकर गांधी जी ने अपने उन मित्र के सहयोग से मांसाहार किया। बाद में माता-पिता से धोखा करने के अपराधबोध के चलते उन्होंने शीघ्र ही इससे दूरी भी बना ली। इस तरह से आजादी के लिए दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन की नींव रखने वाले मोहनदास करमचंद गांधी के मन में जब पहली बार अंग्रेजों को भगाने का ख्याल आया था तो उनका पहला प्रस्तावित आंदोलन समूचे भारत को मांसाहारी बनाने का था। जो कि जाहिर तौर पर हिंसा का ही एक रूप है।

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